फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंजीकृत पर भारी पड़ रहे अपंजीकृत कारोबारी

विज्ञापन
tax - फोटो : tax
विज्ञापन
सिलावन/ललितपुर। मध्यप्रदेश की सीमा से सटा हुआ महरौनी टैक्स चोरों के लिए मुफीद बना हुआ है। यहां के ज्यादातर कारोबारियों द्वारा टैक्स के नाम पर ग्राहकों को मंहगा माल तो दिया जा रहा हैं लेकिन व्यापार कर विभाग को टैक्स की अदायगी नहीं कर डबल मुनाफा कमा रहे हैं। खास बात तो यह है कि यहां अधिकतर कारोबारी बिना जीएसटी में पंजीकरण कराए कारोबार संचालित कर रहे हैं। विभाग भी अपंजीकृत कारोबारियों के सर्वेक्षण की जहमत नहीं उठा रहा हैं। इससे उनके हौसले और अधिक बुलंद हो रहे हैं।
विज्ञापन

महरौनी क्षेत्र में बिल्डिंग मैटेरियल जैसे बालू, गिट्टी, डस्ट, सीमेंट, सरिया के अलावा हार्डवेयर सहित किराना, पान मसाला व गुटखा, तेल, मोटर व ट्रैक्टर पाटर्स, सौंदर्य प्रसाधन, गारमेंटस, सेनेटरी, बर्तन आदि का कारोबार किया जाता है। कारोबार के दृष्टिकोण से देखा जाए तो यहां उक्त सामग्रियों की करोड़ों रुपये की खरीद फरोख्त होती हैं। यहां टैक्स के नाम पर ग्राहकों को महंगा माल तो दिया जाता है लेकिन विभाग को टैक्स नहीं दिया जाता है। क्षेत्र के कुछेक दुकानदारों को छोड़ दिया जाए तो शायद ही कोई ग्राहक को पक्का बिल देता हो। व्यापार को ज्यादा पारदर्शी बनाने के मकसद से सरकार ने जीएसटी लागू की हालांकि कागजी कार्रवाई बढ़ने से व्यापारी जीएसटी में पंजीयन कराने से कतरा रहे हैं। इसके चलते सरकार की मंशा पर तो पानी फिर ही रहा है साथ ही ईमानदार व्यापारियों के व्यापार पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा हैं।
अपंजीकृत व्यापारियों की वजह से पंजीकृत कारोबारियों का धंधा प्रभावित हो रहा है। व्यापार कर विभाग में उनका पंजीयन नहीं होने से वह टैक्स बचा लेते हैं। इससे वह माल सस्ता करके बेच देते हैं।
विज्ञापन

- दिनेश मिश्रा, कारोबारी
जो भी वस्तुओं का क्रय-विक्रय कर रहा है, उसका जीएसटी में पंजीयन होना चाहिए। चाहे वह छोटा व्यापारी हो या बड़ा। इससे एक तो वस्तु की कीमत में समानता आएगी तथा राजस्व में भी बढ़ोत्तरी होगी।
- रीतेश सर्राफ, फर्नीचर कारोबारी
जीएसटी में पंजीकृत व्यापारी जीएसटी जोड़ता है जिससे वस्तु की कीमत बढ़ जाती है। वहीं अपंजीकृत व्यापारी सामान जीएसटी न जोड़कर कम कीमत पर माल बेच देता है। इससे धंधा प्रभावित होता हैं।
- गोलू रिछारिया, कारोबारी
व्यापारी से वस्तु का बिल मांगना ग्राहक का अधिकार हैं। यदि मांगने पर बिल नहीं दिया जाता है तो कानूनी कार्रवाई का प्रावधान हैं परंतु ज्यादातर व्यापारी ग्राहकों को बिल देने में आनाकानी करते हैं।
- देवेंद्र प्रताप सिंह, अधिवक्ता
बिल मांगने पर मना कर देते हैं सामान देने से
अधिकतर दुकानदार सामान का बिल मांगने पर सामान देने से ही मना कर देते हैं। इससे ग्राहक अपने को दुकानदारों द्वारा ठगा हुआ महसूस करता है।
- शिवनारायण
असिस्टेंट कमिश्नर व्यापार कर विभाग राजदीप गुप्ता का कहना है कि विभाग द्वारा लगातार अभियान चलाकर व्यापारियों का पंजीयन किया जा रहा है। कोविड 19 के चलते अभियान प्रभावित हुआ था। जल्द ही फिर से अभियान शुरू किया जा रहा है। इस संबंध में शासन स्तर से निर्देश आ गए हैं। कारोबारी द्वारा बिल न देने पर ग्राहक अगर शिकायत करता है तो विभाग कारोबारी पर कार्रवाई करेगा।
विज्ञापन

- राजदीप गुप्ता, असिस्टेंट कमिश्नर व्यापार कर विभाग
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें