ललितपुर (ब्यूरो)। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल की बैठक में वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) को लेकर चार्टर्ड अकाउंटेंट, कर अधिवक्ताओं और व्यापारियों की संगोष्ठी आयोजित की गई। इस दौरान बताया गया कि जीएसटी में विशेष आडिट का प्रावधान उचित नहीं है।
जगदीश मार्केट स्थित कार्यालय में प्रांतीय उपाध्यक्ष महेंद्र जैन मयूर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में जीएसटी के प्रस्तावित प्रारूप पर चर्चा की गई। कर अधिवक्ता राजकुमार जैन व रमेश चंद्र जैन ने बताया कि जीएसटी लागू होने से पहले चार सौ वस्तुएं वैट अधिनियम में मुक्त हैं, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद कर मुक्त वस्तुएं कितनी होंगी, इसकी स्थिति तय नहीं है।
जीएसटी के अंतर्गत यदि कर आरोपित किया जाता है, तो महंगाई बढ़ेगी। इंटरनेट के माध्यम से व्यापारियों को अपना कर और रिटर्न दाखिल करना होगा। शासन एवं व्यापारियों के हित में पंजीयन की सीमा बढ़ाकर 25 लाख रुपये वार्षिक टर्नओवर वाले व्यापारियों पर जीएसटी लागू किया जाना ही हितकर है।
जीएसटी में विशेष आडिट का प्रावधान उचित नहीं है। चार्टर्ड अकाउंटेंट संजीव जैन ने कहा कि देश में छोटे-छोटे लघु और कुटीर उद्योग हैं। उनको सरकारी संरक्षण दिए जाने के संबंध में कोई स्पष्ट व्यवस्था सरकार ने जीएसटी बिल में नहीं की है। मांग की गई कि प्रस्तावित जीएसटी बिल के प्रारूप में वस्तुओं एवं सेवाओं पर लागू होने वाली करों की दरों में स्पष्ट करे।
इस मौके पर अजय अलया, अभय जैन, मुकेश राठौर, प्रदीप त्रिपाठी, नवीन सिंघई, अशोक अनौरा, संजीव जैन कप्तान, प्रसन्न जैन, सनत जैन, उपेंद्र एंजिल, अनिल अलया, आर एन विश्वकर्मा, सुरेश बाबू उपस्थित रहे।