तालबेहट। तहसील क्षेत्र में छठवीं बार टिड्डी दल ने अपनी दस्तक से कई गांवों के किसानों के सामने चिंता की लकीरें गहरी कर दीं। लोग कड़ी धूप में अपने-अपने घरों की छतों पर जाकर घंटे और थाली बजाने लगे। किसान आने वाले समय में अपनी फसल के रखरखाव को लेकर अभी से चिंतित हो उठा है।
राजस्थान व मध्य प्रदेश के रास्ते जनपद में बार-बार आ रहा टिड्डी दल किसानों और लोगों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। बृहस्पतिवार को टिड्डियों के दो दल तहसील क्षेत्र के गांवों में मंडराए। पहला दल राजघाट से ग्राम लालौन, बांसी, बार होते हुए पूराकलां के रास्ते और दूसरा दल माताटीला, वर्मा बिहार, गेवरा गुंदेरा, पूराविरधा, कंधारी कलां होते हुए मध्य प्रदेश की ओर चला गया। दोनों दलों का फैलाव काफी था, परंतु ऊंचाई पर होने के कारण व किसानों के स्वयं जागरूक होने के कारण यह दल जमीन पर नहीं उतरा।
लगभग छह सप्ताह में टिड्डी दल की क्षेत्र में छठवीं दस्तक से किसान काफी परेशान हैं। पांचवी बार आया दल अभी तक का सबसे बड़ा दल था। परंतु, उस समय किसानों के खेत खाली थे। अब इस समय जब किसानों के खेतों में जुताई बुबाई का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है तो किसानों को चिंता होना लाजमी है। वहीं, टिड्डी दल के आने के सूचना पर कृषि विभाग के दीपेंद्र यादव नजर रखे रहे।
कैसे होगी फसल की रक्षा
तालबेहट। अभी तक टिड्डी दल के आगमन पर कृषि विभाग द्वारा जो तैयारियों की गई हैं, उन्हें देखकर अधिकांश किसान असमंजस में हैं। उसके अनुसार कृषि विभाग द्वारा न तो शोर शराबे के लिए कोई व्यवस्था है और न तत्काल नियंत्रण के लिए तहसील मुख्यालय पर कोई मशीन है।
टिड्डी दल से फसलों को कोई नुकसान नहीं है। इसका सर्वे लेखपाल करेगें। हमें टिड्डी दल पेड़ों पर मिला।
- गौरव यादव, जिला कृषि अधिकारी ललितपुर