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ग्रामीण की हत्या में चार को आजीवन कारावास की सजा

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ललितपुर। थाना महरौनी के ग्राम ग्राम कुम्हैड़ी में 14 साल पहले आपसी विवाद के दौरान एक युवक की हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (न्यू कोर्ट) अनुपम सचान की अदालत ने चार आरोपियों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास एवं पांच लाख अस्सी हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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अपर जिला शासकीय अधिवक्ता खुशीलाल लोधी ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्राम कुम्हैड़ी निवासी कोमल पुत्र प्यारे लाल खंगार ने 10 जुलाई 2006 को कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि 10 जुलाई 2006 को उसका पुत्र संतोष गांव के ही मनसुखा के घर के सामने खड़ा था और मनसुखा से बात कर रहा था। इतने में मनसुख, बल्दू, मनसुख के भाई हजारी ने अपने साथियों के साथ मिलकर पुत्र से गाली गलौज कर लाठी डंडों से मारपीट कर दी। उसके चिल्लाने पर वह, उसकी पत्नी व बहू मौके पर पहुंचे तो लड़के को अलग कराया। देखा तो पुत्र के सिर में खून बह रहा था। काफी लोग एकत्रित हो गए थे। जिस पर लोग जान से मारने की धमकी देते हुए भाग गए। घायल पुत्र को वह उपचार के लिए ले गया और थाने में रिपोर्ट देकर कार्रवाई की मांग की। जिस पर महरौनी पुलिस ने उक्त मामले में मारपीट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया था। उसी रात महरौनी अस्पताल से उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया और जिला अस्पताल में संतोष की मौत हो गई।
जिस पर 11 जुलाई 2006 को मामले में महरौनी पुलिस ने गैर इरादतन हत्या की धारा बढ़ाई। विवेचना के दौरान मृतक की पत्नी गिरजा ने सीजेएम न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर अशोक रिछारिया, सूकी, मनसुख, हजारी पुत्रगण बल्दू व बल्दू के खिलाफ धारा 302, 147, 148, 149 के तहत कार्रवाई की मांग की है। जिसमें न्यायालय द्वारा आदेश दिया गया कि प्रार्थना पत्र को विवेचना में शामिल कर विवेचना कराई जाए। चश्मदीद साथी गिरजा, कोमल व मुन्नी ने पुलिस को शपथ पत्र देकर बयानों में बताया कि उक्त पांचों लोगों ने मिलकर संतोष की हत्या की है। जिसके बाद पुलिस ने आरोप पत्र गैर इरादतन हत्या की धारा 304 के तहत न्यायालय में दाखिल किए गए। जबकि साक्ष्य के आधार पर न्यायालय में यह मामला हत्या की धारा के तहत विचारण किया गया। न्यायालय में इस मामले में अभियोजन की ओर से ग्यारह गवाह पेश किए गए। शनिवार को न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए गवाहों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए आरोपी अशोक रिछारिया को संतोष की हत्या में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास एवं दो लाख रुपये अर्थदंड और उक्त मामले में ही आरोपी मनसुख, बल्दू कुशाहा एवं सूकी को हत्या में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास एवं एक-एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जबकि सभी आरोपियों को जान से मारने की धमकी की धारा में तीन-तीन वर्ष एवं बीस-बीस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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