प्रदेश शासन की मंशानुसार जहां अन्य विभागों में सफाई अभियान जोरों पर चल रहा है, लेकिन विद्युत खंडीय कार्यालय में इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। यहां महत्वपूर्ण फाइलें धूल खा रही हैं और दीवारें पान की पीक से जगह-जगह रंगीं हुई हैं। कार्यालय की दीवारों में पेड़ों की जड़ें फूट पड़ी है, सफाई नहीं की जा रही है। उधर, जिला परिषद परिसर में ही कचरा फेंकने का अस्थाई डंपिंग स्थल बना दिया गया है।
जिला परिषद स्थित परिसर में विद्युत खंडीय कार्यालय का संचालन वर्षों से हो रहा है। नवीन भवन में जहां खंडीय अधिकारी बैठकर सेवाएं देते हैं, वहीं पुराने भवन में 12 से अधिक विद्युत कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। जर्जर हो चुके इस भवन की जहां वर्षों से पुताई नहीं हो सकी है। वहीं जगह-जगह मकड़जाले व धूल देखी जा सकती है। देखरेख के अभाव यहां हर पटल की फाइलें धूल खा रही हैं। कई फाइलें तो कचरे के डिब्बे में भी पड़ी देखी जा सकती हैं। अनुपयोगी फाईलों को कार्यालय में ही अलमारियों के पीछे फेंक दिया जा रहा है। जरूरी फाइलें भी बेतरतीब रखी हुई हैं, जो कई बार खुद कर्मचारियों को ही नहीं मिलती हैं। उपभोक्ताओं को विभागीय लापरवाही के चलते परेशान भी होना पड़ता है। कर्मचारी और उपभोक्ताओं ने पान और गुटखा थूककर कार्यालय की दीवारों को लाल कर दिया है। मुख्यमंत्री द्वारा पूरे प्रदेश में सफाई अभियान छेड़ दिया गया है, इसके बाद आज भी बिजली विभाग के उक्त कार्यालय के हालात जस के तस बने हुए हैं। हालांकि विभागीय अधिकारियों ने शीघ्र ही उक्त कार्यालय की कायापलट करने का आश्वासन दिया है।
वहीं जिला परिषद परिसर में ही विद्युत कार्यालय के पास आए दिन कचरा का ढेर लगा रहता है या फिर यूं कहें कि यहां एकत्रित कचरा को फेककर अस्थाई डंपिंग स्थल बना दिया गया है। यहां कुछ देर ठहरना ही मुश्किल भरा हो जाता है, जबकि उपभोक्ताओं को यहां बिल भरने के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ता है।
विद्युत खंडीय कार्यालय के पुराने भवन का निरीक्षण किया गया है। भवन की स्थिति काफी खराब है, फाइलें के रखरखाव और भवन की पुताई का कार्य शीघ्र शुरू करने के लिए निर्देशित किया गया है। उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए छायादार टिन शेड और वाटर कूलर भी लगवाया जाएगा। कार्यालय में पान, गुटखा रोकने को सख्ती से निर्देशित किया गया है।
गौरव कुमार, अधिशासी अभियंता, विद्युत।