ललितपुर। राजकीय हाईस्कूलों के नवीन भवनों में कमियों को नजरअंदाज कर उन्हें हड़बड़ाहट में हैंडओवर करने की तैयारी चल रही है। किसी भवन में खिड़की और शौचालय अधूरे हैं, कहीं परिसर का समतलीकरण नहीं किया गया है तो किसी विद्यालय के भवन में छत से पानी की उचित निकासी की व्यवस्था नहीं की गई है। इनकी अनदेखी से प्रधानाचार्यों में असंतोष देखा जा रहा है।
जिले में 17 राजकीय हाईस्कूल संचालित हो रहे हैं। इनके नवीन भवन बनाए गए, जिसमें से आधा दर्जन से ज्यादा स्कूलों के नवीन भवन हैंडओवर नहीं हुए हैं। राजकीय हाईस्कूल सुनौरीखेरा का बुरा हाल है। इस स्कूल के भवन में गेट में कुंडी, टैंक, रैंप नहीं बनाया गया है और पूरा परिसर असमतल है। शौचालय की सीट टूटी है। फर्श के टाइल्स में क्रैक हो गए हैं। यही नहीं, कक्षा कक्षों में श्यामपट तैयार नहीं किया गया है।
छत के पानी की निकासी के लिए पाइप नहीं लगाए गए हैं। इसके अलावा अन्य स्कूलों के भवनों में भी कमियां बनी हुई हैं, लेकिन इन कमियों को दरकिनार करते हुए राजकीय हाईस्कूल सुनौरीखेरा के अलावा राजकीय हाईस्कूल नगारा, दूधई, वस्त्रावन, कुम्हैंड़ी, दिदौनिया और गौना कुसमाड़ के विद्यालय भवनों को हैंडओवर करने की तैयारी है। हालांकि प्रधानाचार्य इस बात का विरोध जता रहे हैं। लेकिन, उनका विरोध विभागीय अफसरों के सामने बेअसर साबित हो रहा है।
पहले भी हो चुका ऐसा
नवनिर्मित भवनों की कमियों को पहली बार अनदेखा नहीं किया जा रहा है। इससे पहले भी तीन स्कूलों के भवन इसी तरह हैंडओवर हो चुके हैं, जिसका खामियाजा छात्रों को परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है।
तकनीकी रिपोर्ट तैयार करने में रस्म अदायगी
भवन को हैंडओवर करने से पहले तकनीकी रिपोर्ट ली जाती है। इसमें भी महज औपचारिकता हो रही है। शायद यही वजह है कि सत्यापन अधिकारियों को भवनों की कमियां नजर नहीं आ रही हैं।
कार्यदायी संस्था पर असर नहीं
भवनों के निर्माण के लिए जिम्मेदार कार्यदायी संस्था की लापरवाही पर मंडलायुक्त और डीएम तक कई बार क्लास लगा चुके हैं, लेकिन संस्था पर इसका कोई असर पड़ता दिखाई नहीं दे रहा है। स्थिति यह है कि संस्था चार साल से भवनों का निर्माण कर रही है, लेकिन अभी भी उनमें कई कमियां हैं और भवन को हैंडओवर करने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।