ललितपुर। थाना जखौरा के ग्राम चितरा निवासी कमल सिंह सहरिया ने जिलाधिकारी से शिकायत कर आरोप लगाया कि एक झोलाछाप चिकित्सक के गलत इंजेक्शन से उनकी दस वर्षीय बेटी नैंसी की मौत हो गई। पीड़ित पिता ने आरोपी चिकित्सक पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
कमल सिंह सहरिया के अनुसार, बीते माह सात सितंबर को उनकी बेटी नैंसी को हल्का बुखार और खांसी-जुकाम था। इलाज के लिए ग्राम घिसौली का एक स्थानीय चिकित्सक उनके घर आया। पिता ने खांसी-जुकाम की गोली देने को कहा, लेकिन चिकित्सक ने इंजेक्शन लगाने पर जोर दिया। चिकित्सक ने नैंसी को कमर के नीचे कूल्हे में इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगाते ही बच्ची छटपटाने लगी और कुछ ही देर में मरणासन्न स्थिति में पहुंच गई। उसकी पत्नी राजकुमारी और अन्य परिजन भी वहां मौजूद थे। परिवार ने बच्ची को हिलाया, लेकिन उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और न ही आंखें खोलीं। तब परिवार ने चिकित्सक से पूछा कि यह क्या हो गया। चिकित्सक ने बच्ची को सरकारी अस्पताल ले जाने को कहा। वह नैंसी को सरकारी अस्पताल जखौरा ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। कमल सिंह ने जब चिकित्सक की शिकायत करने की बात कही। तब वह अन्य लोगों और परिजनों के साथ आया। उसने कमल सिंह को बहला-फुसलाकर गालियां और जातिसूचक शब्दों से अभद्रता की। इसके बाद वह जबरदस्ती उसे और परिवार को अपने साथ ले जाकर नैंसी के शव को जबरन मिट्टी में दफना दिया। आरोपी ने अपने लोग एकत्रित कर खाली कागज पर परिवारजनों के अंगूठा निशानी भी करा लिए। आरोप है कि तभी से उन्हें कब्जे में रखा गया है और शिकायत न करने पर 10 लाख रुपये देने का प्रलोभन दिया जा रहा है। पीड़ित पिता ने जिलाधिकारी से उसकी पुत्री की मौत की निष्पक्ष जांच कराते हुए कार्रवाई की मांग की है।