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हिंदी का पाया जब ज्ञान, मिला काम, पाया सम्मान

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कवि पंकज पंडित ललितपुर - फोटो : LALITPUR
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हिंदी पर पकड़ होने से सपना हुआ पूर : निधि दूबे, शिक्षिका
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हिंदी भाषा पर अच्छी पकड़ होने के कारण ही मेरा शिक्षिका बनने का सपना पूरा हुआ। हिंदी बहुत ही सरल और लचीली भाषा है, जिसे सीखने में विशेष कठिनाई नहीं होती है। दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल ने भी हिंदी को अब अपनी सभी सेवाओं में एक माध्यम के रूप में शामिल किया है। हिंदी की वर्णमाला दुनिया की सर्वाधिक व्यवस्थित वर्णमाला है। भारत के विकास के साथ-साथ ही दुनिया में हिंदी का महत्व बढ़ना भी निश्चित है और हम शीघ्र ही हिंदी भाषा को एक वैश्विक भाषा के रूप में देखेंगे। हिंदी से ही हमारा अभिमान है।
हिंदी की काबिलियत ने लोगों तक पहुंचाया भाव : हृदयेश गोस्वामी, रंगकर्मी
ललितपुर के रंगकर्मी हृदयेश गोस्वामी कहते हैं कि भाषा भाव को प्रकट करती है। अगर वे भाव हिंदी में हों तो सीधे हृदय में घर कर जाते हैं। शुरूआत में अंग्रेजी सीखने की बड़ी चाह थी, लेकिन जब हिंदी के महासागर में डुबकी लगाई तो शब्दों को शृंगारित कर उनका उपयोग करना, अपने भावों को दूसरों तक आत्मसात कराना बड़ा ही सहज लगा। इसी काबिलियत ने ना केवल मंच के संचालन में सहयोग किया अपितु रंगमंच के माध्यम से अपनी बात व भाव लोगों तक पहुंचाने में सफलता प्राप्त की। संगीत नाटक अकादमी से जब ड्रामा का प्रशिक्षण किया तो इसी हिंदी के बलबूते इसके भाव को समझकर आज कस्बे में खुद का नाट्य समूह आरंभ कर नाट्य कला मंच संचालित कर रहा हूं। साथ ही कुछ एक वीडियो फ़िल्म व फीचर फिल्म में काम करने के साथ ढेरों रंगमंच के नाटक करने का अनुभव पाया है।
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हिंदी के चमत्कार ने इंडिया टैलेंट शो में दिलाया पुरस्कार : पंकज पंडित, कवि
ललितपुर के कवि पंकज पंडित बताते हैं कि मैं उस संस्कृति के अनुयायी हूं, जहां हिंदी को भाषा नहीं, मां का दर्जा प्राप्त है। अन्य भाषाएं आपको कार दिला सकती हैं लेकिन हिंदी हमें संस्कार देती है। हिंदी विश्व की एक मात्र ऐसी भाषा है जिसका चमत्कार अद्भुत है। हिंदी वह भाषा है जो अ-अज्ञानी से शुरू होती है और हमें ज्ञ- ज्ञानी बनाकर छोड़ती है। हिंदी का शब्द अक्षर से बनता है और अक्षर का अर्थ होता है जिसका कभी क्षय न हो। हिंदी के कारण ही मुझे राजस्थान में आयोजित आठ अगस्त 2018 को ऑल इंडिया टैलेंट शो में प्रतिभाग करते हुए मुझे अभिनेता राजपाल यादव, धवन, अली खान और अभिनेत्री मिस्टी चक्रवर्ती द्वारा संयुुक्त रूप से द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह जीत मेरी नहीं थी। यह हिंदी का चमत्कार था, हिंदी का सम्मान था।
हिंदी ने दिलाई पहचान, अभिनय को दर्शकों ने सराहा : रवि चौहान, अभिनेता
ललितपुर में जन्मे रवि चौहान सांख्यकीय में पोस्ट ग्रेजुएट होने के साथ ही साथ बॉलीवुड में भी अपने बेहतरीन अभिनय के दम पर एक विशिष्ट पहचान बनाने में सफल रहे हैं। उन्होंने बताया कि हिंदी भाषा के कारण ही मैं कई फिल्मों, टीवी, धारावाहिकों और विज्ञापनों में अभिनय कर चुका हूं। हाल ही में प्रदर्शित वेब सीरीज ‘रंगबाज फिर से’ में उनके अभिनय को दर्शकों ने काफी सराहा। सोनी टीवी पर प्रसारित हो रहे लोकप्रिय धारावाहिक एक- दूजे के वास्ते- सीजन-2 में मैं एक आर्मी ऑफिसर का किरदार निभा रहा हूं। सावधान इंडिया, एफआईआर के कई सीरियल में विभिन्न भूमिकाओं में काम कर चुका हूं। सुई धागा, इंडियन 2, दुर्गावती, बंदूक राज, रिपोर्टर रॉबिनहुड आदि में अभिनय का मौका मुझे हिंदी के कारण ही मिला है। कहा कि आज में जिस मुकाम पर हूं, यह सब हिंदी भाषा की ही देन है।
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हिंदी भाषा न होती तो हम इस मुकाम पर न होते : डॉ. पंकज शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर, इतिहास
मेेेेरी शुरु से ही हिंदी में विशेष रुचि रही है और वर्तमान में मैं नेहरु महाविद्यालय ललितपुर में इतिहास विभाग में विभागाध्यक्ष हूं। हिंदी हमारी भाषा है और देवनागरी जिसका धाम है। हिंदी ही जनभाषा है जिस पर मुझे अभिमान है। कोई भी राष्ट्र बिना अपनी मातृभाषा के गूंगा होता है। मुझे गर्व है कि मैं ऐसे देश का निवासी हूं जिसकी भाषा हिंदी और राष्ट्र का नाम हिंदुस्तान है। मैंने सभी उपलब्धियां हिंदी भाषा के कारण ही हासिल की हैं। अगर हिंदी भाषा न होती तो हम इस मुकाम पर न होते। इसलिए हिंदी भाषा ही हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है।

रवि चौहान, अभिनेता ललितपुर- फोटो : LALITPUR

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