डुंगरिया में सहेली समूह ने राजस्थान से केंचुए मंगवाकर कर रहीं खाद की तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। अब महिलाएं हर क्षेत्र में अपना नाम रोशन कर रही हैं। डुंगरिया की गणेशी राजपूत ने कंपोस्ट खाद का निर्माण कर अपनी आय में वृद्धि तो की है, साथ ही जैविक खेती को भी बढ़ावा दिया है।
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत विकासखंड बिरधा के पालीग्रामीण क्लस्टर में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं न केवल जागरूक व शसक्त हो रहीं, बल्कि अपने घर की आजीविका चलाने के लिए रोजगार धंधे स्थापित कर सरकार की मंशा के अनुरूप लखपति दीदी बनने की ओर अग्रसर हो रहीं। ऐसी कहानी डुंगरिया गांव की गणेशी राजपूत की है। वह समूह सखी बनकर गांव में एक दर्जन समूह को आगे बढ़ने को प्रेरित कर रही हैं। साथ ही अपने सहेली समूह की बहिनों के साथ मिलकर दूधई गौशाला में केंचुआ विधि से कंपोस्ट खाद तैयार कर जैविक खेती को बढ़ावा देने में सहयोगी बन रही हैं। वह केवल आठवीं तक ही पढ़ी हैं और समूह से जुड़ने के पूर्व वह केवल घर के काम काज तक ही सीमित थीं लेकिन जैसे ही वह 6 वर्ष पूर्व समूह से जुड़ीं और प्रशिक्षण प्राप्त किया, तो उन्हें समूह सखी के रूप में कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ। इससे 1200 रुपये महीने की आमदनी होना प्रारंभ हुई। साथ ही पिछले वर्ष गोशाला में कंपोस्ट खाद बनाने वाला कार्य आया तो उन्होंने समूह की महिलाओं को अपने साथ कार्य करने के लिए तैयार किया। ब्लॉक मिशन प्रबंधक संतोष पाल व अशोक पाण्डेय का सहयोग लेकर राजस्थान से केंचुए मंगवाए और कंपोस्ट खाद बनवाना शुरू किया। इसके बाद मार्केटिंग की समस्या सामने आई तो बीएमएम और डीएमएम के सहयोग से उद्यान विभाग में खाद बेचना प्रारंभ किया, जहां अभी तक लगभग 14 क्विंटल खाद बिक चुकी है। आगे करीब 25 क्विंटल खाद और समूह की दीदियों ने तैयार कर ली, जिससे अच्छी आमदनी उनको होने लगे। इस प्रकार से समूह सखी गणेशी राजपूत अपना स्वयं का कारोबार स्थापित कर हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं।