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जमकर हो रहा सैंड स्टोन का खनन

Fri, 14 Apr 2017 12:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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mining - फोटो : demo
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जनपद में खनिज संपदा की बहुलता होने के साथ ही इसका अवैध दोहन भी जमकर हो रहा है। बड़ी मात्रा में हो रहे अवैध खनन में वन विभाग कर्मियों की मिलीभगत के आरोप भी लगते रहे हैं। धौर्रा क्षेत्र में बड़ी मात्रा में अच्छी गुणवत्ता का सैंड स्टोन बड़ी मात्रा में उपलब्ध है, लेकिन इसके साथ ही यहां पर वन क्षेत्र का क्षेत्रफल भी काफी बड़ा है। कम लागत व महंगा पत्थर निकालने के लिए खनिज कारोबारी वन रेंज में खुलेआम अवैध खनन कर रहे हैं। वन क्षेत्र में दिनदहाड़े हो रहे अवैध खनन से वन संपदा को जमकर नुकसान हो रहा है। इस मामले में कई बार शिकायतेें वन विभाग से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई न होने से अवैध कारोबार करने वालों के हौसले बुलंद बने हुए है। मुहल्ला महावीरपुरा निवासी अंतिम कुमार ने मुख्यमंत्री को भेजे शिकायती पत्र में आरोप लगाया है, कि जनपद में वन रेंज में जमकर अवैध खनन हो रहा है। शिकायती पत्र में उन्होंने जीपीएस नंबर का उल्लेख किया है, जिन बिंदुओं पर अवैध खनन हो रहा है। 

इन क्षेत्रों में हो रहा अवैध खनन
जाखलौन थाना क्षेत्र केे ग्रामों में वन रेंज में अवैध खनन हो रहा है। जिन जगहों पर सबसे ज्यादा अवैध खनन हो रहा है, उनमें महुआ बाई खदान, चिकना पाटा, चांदपुर वन ब्लॉक, सैपुरा, रमपुरा, कपासी, हरदारी, सूमे की पहाड़ी, बाग बंट रेंज, सोंधनी पाली क्षेत्र शामिल हैं। 
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अवैध खनन का वैध परिवहन
वन रेंज से अवैध तौर पर खनन निकाले जा रहे सैंड स्टोन को योजनाबद्ध तरीके से वैध बनाकर दूसरे जनपदों में भेज दिया जाता है। धौर्रा क्षेत्र में सैकड़ों खदानों के पट्टे खनिज विभाग द्वारा आवंटित किए गए हैं। फारेस्ट रेंज से अवैध खनन निकाले गए पत्थरों को वैध खदानों के एमएम 11 प्रपत्र पर वैध बनाकर दूसरे जनपदों में बेच दिया जाता है। जनपद में कई खदानें ऐसी हैं, जिनकी लीज को मंजूरी मिले वर्षों बीत गए, लेकिन मौके पर एक फुट भी खनन नहीं किया गया। ऐसी खदानों के एमएम 11 प्रपत्र पर ही अवैध रूप से निकाले गए सैंड स्टोन को वैध दिखाया जाता है।
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वन क्षेत्र में अवैध खनन व कटान पर पूरी नजर रखी जा रही है। जहां पर भी अवैध खनन की सूचना मिलती है, कठोर कार्रवाई की जा रही है। कई जगहों पर खदान मालिकों द्वारा अपनी खदान की सीमा का अतिक्रमण करने की घटनाएं सामने आईं है, सीमांकन कर वन रेंज में खनन करने पर मुकदमा दर्ज कर शमन शुल्क की वसूली की जा रही है। पिछले 15 दिनों एक लाख 83 हजार रुपये शमन शुल्क वसूला गया है। 
- वीके जैन, डीएफओ
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