संवाद न्यूज एजेंंसी
ललितपुर। मड़ावरा व गौना वन रेंज में टाइगर रिजर्व बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। कई कमियां होने के कारण शासन ने इसे वापस कर नए सिरे से तैयार करने के निर्देश दिए हैं। पुराने टाइगर रिजर्व प्रोजेक्ट में टाइगर के विचरण का रूट स्पष्ट नहीं था।
वन क्षेत्र में जैव विविधता की भरमार है। ग्रामीण बाघ होने की बात करते थे, तो वन विभाग तेंदुआ व लकड़बग्घा बताते हुए ग्रामीणों की आंखों देखी को इन्कार कर देता था। इसी बीच छह माह पूर्व जंगलों में ट्रैप कैमरे लगाए गए। इन कैमरों में कैद तस्वीरों की तीन बार की जांच में बाघ के लखंजर के जंगलों में विचरण की पुष्टि हो चुकी है। वह इन जंगलों में सपरिवार निवास कर रहा है, क्योंकि कैमरे में नर व मादा दोनों की तस्वीरें कैद हुई हैं।
वन विभाग ने इन सभी के फोटोग्राफ शासन स्तर पर भेजे थे। शासन ने जनपद स्तर पर टाइगर रिजर्व बनाने के लिए प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसे तैयार कर प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन शासन ने नए सिरे से प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश जारी किए। अब कमियों को दूर करते हुए वन विभाग प्रोजेक्ट तैयार कर रहा है।
बढ़ाया जाएगा संरक्षित क्षेत्र : लखंजर, पापड़ा, गौना, अमझरा, देवगढ़ के वन क्षेत्रों में बाघ, तेंदुआ, भालू, लकड़बग्घा, सांभर, हिरन, बारहसिंगा व अन्य प्रजाति के जानवर मौजूद हैं। जंगली इलाकों में इनके मूवमेंट पर नजर रखने के लिए 24 कैमरे लगाए गए हैं। लगातार इन जानवरों की तस्वीरों से इनकी मौजूदगी की पुष्टि हो रही है। अब टाइगर रिजर्व बनाने के लिए बाघ के विचरण करने को पूरा एरिया चिह्नित किया जाएगा। बाघ जंगल में 90 किलोमीटर लंबी अपनी टेरिटरी बनाता है। सूत्रों का कहना है कि यह विंध्याचल पर्वत की तराई वाले इलाके में विचरण करता है।
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शासन ने नए सिरे से टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट का प्रस्ताव मांगा है। इसे तैयार किया जा रहा है। शासन को भेजने के बाद वहां से प्राप्त दिशा निर्देशों पर कार्य प्रारंभ किया जाएगा।-गौतम सिंह, प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी।