ललितपुर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) की अदालत ने थाना बार अंतर्गत ग्राम चिगलौआ निवासी चार अभियुक्तों को दलित उत्पीड़न, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के मामले में दोषी पाते हुए चार- चार वर्ष के कारावास और दो-दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
थाना बार अंतर्गत ग्राम बुरौगांव चिगलौआ निवासी कोमल पुत्र गोविंद दास अहिरवार ने तहरीर में बताया था कि 17 जुलाई 2002 को पीसीपी कंपनी प्लांट को अपनी जमीन किराए पर दी थी। जब उसका किराया मांगने गया, तो वहां मौजूद तुलसीराम, सरमन, इमरत निवासीगण ग्राम चिगलौआ व एक अज्ञात व्यक्ति वहां आए और उससे गाली-गलौज करने लगे। जब गाली देने से मना किया तो उक्त लोगों ने जातिसूचक शब्दों से अपमानित कर फावड़ा व खुरपा से मारना - पीटना शुरु कर दिया। मुझे बचाने पिता गोविंददास पुत्र परम आए तो उनको भी फावड़ा व सरिया मारकर गंभीर रुप से घायल कर दिया। चिल्लाने की पर आसपास के लोगों को आता देख घटना को अंजाम देकर हमलावर जान से मारने की धमकी देकर भाग गए। उक्त मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किए थे, जिसके बाद से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था।
मंगलवार को न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए सभी हमलावर तुलसीराम, सरमन, इमरत व अज्ञात के रुप में अखिलेश पाल को एससी/एसटी एक्ट व जान से मारने, गाली-गलौज कर मारपीट करने के मामले में दोषी पाते हुए चार-चार वर्ष के कारावास और दो-दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मामले की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने की।