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Lalitpur News: ठेकेदार को आत्महत्या के लिए उकसाने में ईई परीक्षण समेत चार अधिकारियों पर कोर्ट में चलेगा मुकदमा

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- न्यायालय में पेश की गई अंतिम आख्या हुई निरस्त, प्रोटेस्ट प्रार्थनापत्र परिवाद के रूप में दर्ज
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। विद्युत मीटर का कार्य करने वाले ठेकेदार को आत्महत्या के लिए उकसाने के दो वर्ष पुराने मामले में न्यायालय ने पुलिस द्वारा लगाई गई एफआर को निरस्त कर दिया। अब अदालत में मीटर विभाग के अधिशासी अभियंता समेत चार अधिकारियों से 29 नवंबर को न्यायालय में सुनवाई होगी।
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जनपद औरैया के ग्राम नसीराबाद निवासी जयवीर सिंह पुत्र रामाधार ने दो वर्ष पहले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि उसका भाई मोहित ललितपुर में विद्युत विभाग में तीन वर्षों से एमके कंस्ट्रक्शन फर्म के नाम से ठेकेदारी कर मीटर लगवाने व विद्युत संबंधी अनेक कार्य करा रहा था। कार्य पूर्ण होने के पश्चात भी विभाग में तैनात मीटर सहायक अभियंता संजय सिंह, अविनाश जैन, उपखंड अधिकारी संजीव यादव एवं विद्युत परीक्षण खंड अधिशासी अभियंता मनोज राय द्वारा बीजकों के भुगतान के लिए पचास फीसदी कमीशन की मांग की जा रही थी। उसके भाई ने असमर्थता जाहिर कर कमीशन नहीं दिया, तो उक्त लोगों ने धमकी देकर गलत तरीके से उपरोक्त फर्म पर विद्युत थाने में रिपोर्ट दर्ज करवा दी, जिससे उसका भाई मानसिक तनाव में रहने लगा। इसके बाद 20 जुलाई को सुबह भाई के मोबाइल से उसके मोबाइल पर फोन आया कि विद्युत विभाग के उक्त चारों अधिकारियों व अन्य लोग उसे कई दिनों से जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। बाद में कई बार उसका फोन आया कि उक्त लोग जान से मारने की कोशिश कर रहे हैं। फिर दोपहर में फोन पर बताया कि उसका घर घेर लिया है और धमका रहे हैं। शाम को छह बजे खाना बनाने वाले सौरभ राठौर व पुलिस के माध्यम से सूचना मिली कि उसका भाई फंदे पर लटका पाया गया है। उसने कोतवाली पुलिस व एसपी को शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर उसने न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया और न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली। इसके बाद पुलिस ने विवेचना में कुछ लोगों के पत्रों को शामिल किया गया, जिसमें उक्त व्यक्तियों द्वारा उसके भाई को विभिन्न धनराशि बिलों के बावत दिए जाने के तथ्य अंकित किए गए, लेकिन उक्त व्यक्तियों द्वारा अपने संयोजन खाता संख्या व बकाया राशि या मोहित कुमार को धनराशि दिए जाने की तारीख अंकित नहीं है। आरोप लगाया कि विवेचक द्वारा साक्ष्य एकत्रित करने का प्रयास नहीं किया गया और आरोपियों का बचाव करते हुए अंतिम आख्या न्यायालय में दी गई है। इस मामले में अब न्यायालय ने पुलिस द्वारा पेश की गई अंतिम आख्या याानी एफआर को निरस्त कर दिया है और प्रोटेस्ट प्रार्थनापत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करते हुए सभी चारों आरोपी अधिकारियों को 29 नवंबर को न्यायालय ने पेश होने के आदेश दिए हैं।
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