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बिना अनुमति वन विभाग की जमीन पर बन गई कालोनी

Sun, 18 Oct 2015 01:10 AM IST
ब्यूराे/अमर उजाला
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ललितपुर। सिंचाई विभाग द्वारा सैकड़ों एकड़ जमीन बिना इजाजत के अधिग्रहीत कर ली गई, लेकिन वन विभाग मौन बना हुआ है। सिंचाई विभाग ने वन विभाग की जमीन अधिग्रहीत करने के बदले में पैसे का भुगतान भी नहीं किया है।
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30 अक्तूबर 2002 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार वन भूमि को बिना केंद्रीय वन मंत्रालय की इजाजत के अधिग्रहण नहीं किया जा सकता और अधिग्रहण जमीन की कीमत अदा किए बिना उसका उपयोग नहीं किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय वन मंत्रालय ने सितंबर- 2003 में वन भूमि के दाम नेट प्रेजेंट वैल्यू के आधार पर तय किए थे। एक मामले में आपत्ति आने के बाद वन विभाग ने सिंचाई विभाग को नोटिस जारी किया, तब जाकर उसको बदले में दूसरी जमीन व उस पर पौधारोपण करने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से धनराशि दी गई।



सिंचाई खंड तृतीय का कमाल
ललितपुर। सिंचाई निर्माण खंड तृतीय ने वन विभाग के साथ प्रभावित किसानों के साथ भी धोखाधड़ी की है। सिंचाई निर्माण खंड तृतीय ने लोअर रोहिणी बांध का निर्माण किया। इस बांध के निर्माण में जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई, उन किसानों के लिए शासन की ओर से पुनर्वास कालोनी की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। सिंचाई निर्माण खंड तृतीय ने ग्राम डोंगरा में पुनर्वास कालोनी  का निर्माण कराया और उसे ग्रामीणों को समर्पित कर दिया। सिंचाई खंड तृतीय ने यह पुनर्वास कालोनी वन विभाग की जमीन पर निर्मित की है, जिसकी भनक वन विभाग को भी नहीं है। ऐसे में जो किसान पुनर्वास कालोनी में मिले मकान को अपना समझ रहे हैं, वह नियमत: अवैध है।
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20 एकड़ में बनी पुनर्वास कालोनी
सिंचाई निर्माण खंड तृतीय ने डोंगरा खुर्द गांव में एक पुनर्वास कालोनी का निर्माण कराया है और इसको ग्रामीणों को समर्पित कर दिया। सिंचाई विभाग ने 20 एकड़ जमीन पर पुनर्वास कालोनी बनाई है। इसके लिए ग्राम डोंगरा खुर्द के निवासी वरजोरे अहिरवार से करीब चार एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई थी, बाकी कालोनी के लिए वन विभाग की जमीन का इस्तेमाल किया गया। वन विभाग की जमीन के अधिकार पत्र ग्रामीणों को सिंचाई विभाग की ओर से दे दिए गए।
शहजाद बांध के निर्माण को भले ही वर्षों हो गए है, लेकिन अभी तक उसमें शामिल की गई सैकड़ों एकड़ वन भूमि मंजूर नहीं हुई है। बांध के लिए वन विभाग की 368 हेक्टेयर वन भूमि का अधिग्रहण किया गया था। जमीन की नेट प्रेजेंट वैल्यू 21 करोड़ 34 लाख 98  हजार रुपये वन विभाग को मिलने चाहिए थे। करीब 30 साल बाद सिंचाई विभाग ने वन विभाग को 56 करोड़ रुपये दिए और शहजाद बांध के निर्माण के दौरान कटे वृक्षों के बदले पौधरोपण कार्य फीरोजाबाद में किया जा रहा है। जाखलौन पंप केनाल के निर्माण के लिए 32.71 हेक्टेयर वन विभाग की जमीन का उपयोग किया गया, जिसके लिए वन विभाग को तीन करोड़ रुपये दिए जाने थे, लेकिन राशि का भुगतान नहीं किया गया है। उटारी बांध के निर्माण के लिए 67.19  हेक्टेयर वन भूमि का अधिग्रहण किया। इस जमीन पर 14,141 पेड़ लगे हुए थे, जिन्हें बांध निर्माण के दौरान काट दिया गया। इस जमीन को भी बिना इजाजत अधिग्रहीत कर लिया गया था, लेकिन केंद्रीय वन मंत्रालय की आपत्ति के बाद सिंचाई निर्माण खंड प्रथम की ओर से ग्राम बानपुर म्यांव में क्षतिपूरक वनीकरण के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई है व बकाया राशि को वन विभाग में जमा कराने का आश्वासन दिया है।
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- इंजी. नरेंद्र कुमार जड़िया
अधिशासी  अभियंता, सिंचाई निर्माण खंड  तृतीय




ग्राम डोंगरा खुर्द  में वन विभाग की जमीन का सिंचाई विभाग द्वारा इस्तेमाल करने की  जानकारी नहीं है। सबंधित  अधिकारियों से मामले की जानकारी की जाएगी।
- वी के जैन,
प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी



पुनर्वास  कालोनी के लिए कुछ एकड़ जमीन उनके गांव के एक निवासी से ली गई है। बाकी कालोनी का निर्माण वन विभाग की जमीन पर कराया गया है।
- भानु प्रताप सिंह
ग्राम प्रधान डोंगरा खुर्द
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