महरौनी(ललितपुर)। किसान एग्रो टेक कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के नाम से श्याम सिंह सेंगर चिटफंड कंपनी कई वर्षों चला रहा था। खाताधारकों ने बताया कि वह करीब 2013 से पल्स कंपनी में काम करता था, जो वर्ष 2014-15 में बंद हो गई थी। खाताधारक ब्रजेंद्र पटेल ने बताया कि पल्स बंद हो जाने के बाद भी किसान एग्रो टेक में नाम बदलने की बात कहते हुए सवा लाख रुपये का पेमेंट कर दिया था, जिससे उन लोगों का विश्वास और भी बढ़ गया और वे खाता चलाते रहे। पल्स कंपनी बंद हो जाने के बाद वह किसान एग्रो टेक कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के नाम से एक कंपनी चलाकर क्षेत्र के गरीब, मजदूर व मध्यम वर्ग के लोगों को जोड़ा गया था और प्रतिदिन व मंथली व फिक्स डिपॉजिट खाते चलाता रहा। श्याम जी सेंगर के पास साहिबा ने 50 हजार रुपया, प्रकाश कुशवाहा निवासी खिरिया लटकन जू ने तीन हजार रुपया महीना के हिसाब से पासबुक चलाई और एक लाख की एफडी तीन वर्ष के लिए और एक एफडी एक लाख की छह वर्ष के लिए जमा किया था।
सचिन खटीक (40 हजार रुपये), धीरेंद्र कुमार (93,600 रुपये) विवेक खटीक (40 हजारह रुपये), ब्रिजेंद पटेल (62 हजार रुपये), कपिल सेन (18 हजार रुपये), मलखान अहिरवार (30 हजार रुपये), धर्मेंद्र सेन(1.44 लाख रुपये), आरिफ (75हजार रुपये), अरविंद सेन(15 हजार रुपये), दीपक सेन (15 हजार रुपये), प्रमोद चौरसिया (चार लाख रुपये), प्रमेंद्र सेन (42 हजाहर रुपये), अतुल सेन (तीन लाख रुपये), केलेंद्र सिंह (आठ लाख रुपये), छक्की लाल सेन (डेढ़ लाख रुपये), गोलू चाय वाले(14 लाख रुपये), हमीद खॉ(1.40 लाख रुपये), विष्णू गुप्ता(22 हजार रुपये), सुरेंद्र राय (एक लाख नब्बे हजार रुपये), कांशीराम राय (25 हजार रुपये), मुवीना वानो(50 हजार रुपये), राहुल सेन (44 हजार रुपये), प्रवीण सेन (48 हजार रुपये), वाहिद राईन (दो लाख रुपये)आशीष कुमार (90हजार रुपये), प्रहलाद पटेल (एक लाख रुपये), राहुल सेन (52हजार रुपये), जुगल सेन (50 हजार रुपये),ब्रजेश सेन (40हजार रुपये), रोहित सेन (40 हजार रुपये),नीलेश सेन (56हजार रुपये) सहित सैकड़ों लोगों की खून पसीने से कमाकर जमा की गई राशि लेकर भाग जाने से लोगों में आक्रोश व्याप्त है। इसी धोखाधड़ी के तहत श्यामजी सेंगर समेत कोतवाली महरौनी पुलिस ने आठ आरोपियों पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
चेक व एफडी में हस्ताक्षर भी अलग-अलग
खाताधारकों ने बताया कि जो चेक व एफडी उन लोगों को दिए गए थे, उन पर भी फर्जी हस्ताक्षर हैं सभी में अलग-अलग तरह से हस्ताक्षर किए गए हैं। इसी से साफ होता है कि संचालक की नियत भुगतान करने की नहीं थी।
दो खाता खोले थे, जिसमें इक्कीस सौ रुपये महीना के हिसाब से जमा करते थे और पत्नी के नाम से एक लाख 40 हजार रुपया फिक्स डिपॉजिट में जमा किया था।
-अब्दुल सलीम चेकर महरौनी।
साढ़े चार लाख रुपये की पिकअप बेची थी, जिसको श्यामजी ले गए और खाली चेक दे गए थे ।
-सीमा बानों महरौनी।
86 हजार चार सौ रुपये की एफडी दो वर्ष के लिये जमा किए थे।
संतोष भौंडेले महरौनी।
एक लाख 26 हजार की एक एफड़ी मार्च 2020 में कराई थी तीन वर्ष के लिए। जबकि दूसरी एक लाख 26 हजार फरवरी 2020 में तीन वर्ष के लिए और डेली के खाते में अपने व पत्नी व बच्चों के नाम से रुपया डेली पासबुक में जमा करता था।
-बलराम भंडारी।