महरौनी। तहसील क्षेत्र के किसान अतिवृष्टि से बर्बाद हुई उड़द की फसल का मुआवजा कम मिलने से किसान परेशान हैं। आरोप है कि उन्हें नियमानुसार मुआवजा नहीं मिल रहा है। तहसील कर्मचारियों की मनमानी के कारण बड़े किसानों को आर्थिक लाभ की जगह मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।
बोई गई उड़द और सोयाबीन की फसल अतिवृष्टि से नष्ट हो गई थी। सरकार ने उड़द फसल के नुकसान पर मुआवजा देने के लिए धनराशि आवंटित की है। नियम के अनुसार, बड़े काश्तकार किसानों को दो हेक्टेयर तक के नुकसान पर प्रति हेक्टेयर आठ हजार पांच सौ रुपये मिलने चाहिए। इस हिसाब से एक बड़े किसान को कुल 17 हजार रुपये प्राप्त होने थे। किसानों का आरोप है कि उन्हें एक हजार से लेकर आठ हजार रुपये तक ही मिल रहे हैं। कई किसान 15 दिन से तहसील के चक्कर लगा रहे हैं। किसानों ने मुख्यमंत्री से नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है।
किसानों की आपबीती
मैंने 10 एकड़ में उड़द बोया था मुआवजा पांच हजार दो सौ पचास रुपये आए है हमें नियमानुसार मुआवजा दिया जाना चाहिए ।-अनुज प्रताप सिंह, किसान
मैंने नौ एकड़ में उड़द की फसल बोई थी लेकिन मुआवजा एक हजार रुपये मिला। नियमानुसार 17 हजार रुपये मिलना चाहिए था। जिलाधिकारी से इस मामले की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग है।
मुकेश सिंह, किसान जखौरा
साढ़े पांच एकड़ में उड़द की फसल बोई थी 3600 रुपये मुआवजा दिया जबकि नियमानुसार 17000 रुपये मुआवजा के मिलने चाहिए थे। जिलाधिकारी से जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
- अनंत सिंह,किसान जखौरा।
वह बड़े काश्तकार हैं 10 एकड़ जमीन में उड़द की फसल बोई थी। लेकिन राजस्व विभाग से आठ हजार रुपये मुआवजा मिला है। कर्मचारी सरकार की छवि धूमिल करने में लगे हुए है। मैंने जन सुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई है।
-नरेंद्र सिंह,किसान महरौनी।
आरोप गलत है, किसानों ने जितने एकड़ खेत में उड़द बोई गई थी, उसी के हिसाब से मुआवजा दिया जा रहा है।-जगमोहन जोशी, तहसीलदार महरौनी।