झांसी। बुंदेलखंड के फागोत्सव में ईसुरी की चौकड़िया, चंद्रसखी के होली के रसिया और फागों के राई गायन नृत्य का अपना अलग स्थान है। बदले वक्त के साथ अब फागोत्सव में राई गायन व नृत्य बहुत कम दिख्राई देता है। किसी जमाने में बुंदेंलखंड के सामंत, जमीदार और जागीरदारों के घर पर होने वाले होली उत्सवों में राई नृत्य स्टेट्स सिंबल हुआ करता था, पर धीरे धीरे इसका चलन खत्म हो गया। यह नृत्य बेड़नी जाति की महिलाएं करती हैं, इनके पति या अन्य परिजन उनके साथ ढोलक व हारमोनियम बजाते हैं। बेड़नी जाति के लोग झांसी जिले में मऊरानीपुर के गढ़वा गांव में रहते हैं जबकि ललितपुर जिले के मड़ावरा क्षेत्र के रनगा में रहते हैं। होली के मौके पर होने वाले राई नृत्य में कई महिलाएं एक साथ ढोलक की थाप पर नृत्य करती हैं तथा लोग उन पर रंग गुलाल की बरसात करते हैं। इस दौरान महिलाएं व उनके साथी होली के राई गीत गाते हैं। राई गीतों में नायिका नायक से घर आकर फाग खेलने का आग्रह करती हैं। बुंदेलखंड में राई गीत, फागुन को महीना रंगीलो रे घरे आ जइयो श्याम तथा तोरी होरी की नीयत में खोट कन्हैया, चोट लगी मोरी छाती में, खूब गाए जाते हैं। पहले यह भी परंपरा थी कि फगुआरे वाले दिन जब गांव की होली उठती थी तो उसके साथ राईनृत्यांगनों की पार्टी भी साथ चलती थी तथा वे द्वार-द्वार पर नृत्य करतीं थी, पर अब यह परंपरा बंद हो गई है।
मड़ावरा (ललितपुर)। जिले के मड़ावरा क्षेत्र में होली पर बुंदेली सैरा गायन एवं राई लोक नृत्य की विधा लोगों को होली के रंगों में सराबोर कर देती है। मड़ावरा क्षेत्र में रहने वाली बेड़नी जाति की नृत्यांगनाओं का नृत्य होली पर खास रंग भर देता है, पर इसका चलन अब धीरे धीरे कम होता जा रहा है। होली के कार्यक्रम को भव्यता प्रदान करने के लिए रनगांव गांव की सभी नृत्यांगनाएं शामिल होतीं हैं। कार्यक्रम को देखने को क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में पहुंचते है। हालांकि, अब होली पर्व पर इस तरह के आयोजनों में कमी आई है। रनगांव की बेड़नी जाति की महिलाओं करा राई नृत्य राष्ट्रपति पुरस्कार से पुरस्कृत हो चुका है।
ढोलक की थाप एवं मंजीरे की गूंज के साथ क्षेत्र के गांव-गांव में फाग का उत्सव चलता है। कार्यक्रम की शुरुआत सबसे पहले गांव के धार्मिक मंदिर पर गांव के पूरे ग्रामीण उपस्थित होकर गायन करते हैं इसके बाद गांव की गलियों में फाग गायक टोली के साथ नाचते गाते हुए फाग गायन करते हैं। इसमें होली के कार्यक्रम को भव्यता प्रदान करने के लिए रनगांव गांव की सभी नृत्यांगनाएं शामिल होतीं हैं। कार्यक्रम को देखने को क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में पहुंचते है। हालांकि, अब होली पर्व पर इस तरह के आयोजनों में कमी आई है।
-बंधू पाल फाग गायक
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होली के पर्व की बात ही निराली है। गांव के सभी लोग होलिका दहन करते हैं। गांव में राई गीत व नृत्य मे ंढोलक की थाप की अपनी अलग जगह होती है।
-लखन सिंह, ढोलक वादक
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फोटो 6
कैप्सन- गुलाबबाई नृत्यांगना
ग्राम रनगांव के मोती महाराज मंदिर प्रांगण में होली की रंग पंचमी को विशाल कार्यक्रम आयोजित होता जिसमें बेड़नी जाति सभी नृत्यांगनाएं एकत्रित होकर फागोत्सव को यादगार बनाती हैं।
-गुलाबबाई, रनगांव राई नृत्य की नृत्यांगना
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होली का पर्व मनाने के लिये सभी मे उल्लास रहता है पहले हम लोगों को जगह-जगह आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में बुलाया जाता था, पर अब कुछ वर्षों से कार्यक्रमों में कुछ कमी आई है। पर, इसके बावजूद आज भी होली के कार्यक्रमों में धूम देखने को मिलती है।
-ऊषा, रनगांव नृत्यांगना
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होली पर्व में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में हम लोगों को विशेष महत्व दिया जाता है होली के रंग में रंगे लोग ढोलक, नगड़िया की थाप व मंजीरे की झनकार पर थिरकते हैं, मुझे भी यह कार्यक्रम बहुत अच्छे लगते हैं।
-पूजा, रनगांव नृत्यांगना
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