ललितपुर। परिषदीय शिक्षकों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई से शिक्षक संघों के नेता एक मंच पर आ गए हैं। बृहस्पतिवार को उन्होंने बैठक कर शिक्षकों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई पर रोष व्यक्त किया।
वक्ताओं ने कहा कि बच्चों के कमजोर शैक्षिक स्तर के पीछे प्रमुख छह कारण हैं, जिन पर विभागीय अफसरों को विचार करने की जरूरत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शिक्षकों की समस्याएं नहीं सुनी गईं तो मजबूर होकर बीस जनवरी को बीएसए कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राजेश लिटौरिया, पूर्व माध्यमिक विद्यालय के जिलाध्यक्ष नीरज चतुर्वेदी व राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष रविकांत ताम्रकार ने संयुक्त रूप से विज्ञप्ति जारी कर बताया कि परिषदीय विद्यालयों में छापामार कार्रवाई चल रही है। इस दौरान अनेक कमियां मिल रही हैं, जिनके मामले में शिक्षकों पर एकतरफा कार्रवाई हो रही है। शिक्षक अकेला दोषी नहीं है।
स्कूलों में जबरन विद्यालयों में घटिया ड्रेस की आपूर्ति की गई है। इस मामले में केवल शिक्षक को ही टारगेट बनाया जा रहा है। शिक्षा के अधिकार अधिनियम में स्पष्ट है कि बिना स्पष्टीकरण के शिक्षकों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती है। उन्होंने नवनियुक्त शिक्षकों को पहला वेतन देने की मांग की है।
यह बताए छह प्रमुख कारण
शिक्षकों से पूरे वर्ष गैर शैक्षणिक कार्य कराना, शिक्षकों को अस्थाई संबद्ध रखना, प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों की कमी होना, छात्रों के पास शिक्षण सामग्री का अभाव होना, गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार व्यक्ति का उदासीन होना और अभिभावक जागरूक नहीं होना।