ललितपुर। रेलवे स्टेशन पर लगी स्वचालित सीढ़ियां अक्सर बंद देख यात्रियों को सीढ़ियों (जीना) से चढ़कर दूसरे प्लेटफार्म पर जाना पड़ता है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्वचालित सीढ़ियां बंद नहीं होती बल्कि सेंसर काम करता है। यदि कोई यात्री अनावश्यक रूप से बटन दबा देगा तो लॉक लग जाएगा। जिसे चाबी से खोला जा सकता है। यहां लगे एस्केलेटर में 43 प्रकार के सेंसर लगे हुए हैं, जिससे कोई भी दिक्कत आने पर स्वत: ही सीढ़ियों का संचालन बंद हो जाता है।
रेलवे स्टेशन पर एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर जाने के लिए रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए एक करोड़ बीस लाख रुपये की लागत से एस्केलेटर (स्वचालित सीढ़ियां) लगाए गए हैं। इन एस्केलेटर में सेंसर लगाए गए हैं। पांच मिनट तक कोई व्यक्ति इन सेंसर के संपर्क में नहीं आता है, तो सीढ़ियों का संचालन स्वत: ही बंद हो जाता है।
कई यात्री एस्केलेटर को बंद देख लौट जाते हैं। जबकि इनके पास पहुंचने पर सेंसर काम करने लगता है और एस्केलेटर का संचालन शुरू हो जाता है। यदि कोई व्यक्ति इन स्वचालित सीढ़ियों में लगे बटन को भी दबा देता है तो इन एस्केलेटर का सिस्टम लॉक हो जाता है। विभागीय अधिकारियों के अनुुसार एस्केलेटर में 43 प्रकार के सेंसर लगे हैं। जिससे यदि सीढ़ियों पर कोई सामान तेज धमक के साथ गिर जाता है या कोई व्यक्ति सीढ़ियों पर धमक के साथ उछल जाता है तो भी सेंसर होने के चलते सीढ़ियों का संचालन बंद हो जाता है।
एस्केलेटर का संचालन लगातार हो रहा है। इसमें कई प्रकार के सेंसर लगे हैं। ऐसे में यात्री सामानों को सीढ़ियों पर न गिराएं।
-मनोज कुमार सिंह, पीआरओ, रेलवे झांसी।