ललितपुर। दवा के थोक विक्रेता अवैध तरीके से झोलाछापों को दवा व इंजेक्शन बेच रहे हैं। जबकि, वे सिर्फ पंजीकृत मेडिकल स्टोर व अस्पतालों को दवा की सप्लाई कर सकते हैं।
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण लोगों की जान से खिलवाड़ चल रहा है। मानक के अनुसार थोक दवा विक्रेता सिर्फ पंजीकृत मेडिकल स्टोर संचालकों व अस्पतालों को ही दवा की बिक्री करेंगे। इसके बाद भी आसानी से झोलाछाप और बीएएमएस चिकित्सकों के पास अंग्रेजी दवाएं व इंजेक्शन मौजूद होते हैं, इसमें नींद की गोलियां व अन्य प्रतिबंधित दवाएं शामिल हैं। अगर इन्हें दवा विक्रेता उपलब्ध नहीं करा रहे हैं तो इनके पास ये दवाएं कहां से आ रही हैं, यह बड़ा सवाल है।
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केस -एक
बांसी में एक माह पूर्व एक अवैध क्लीनिक संचालक ने छह माह की बच्ची को गलत इंजेक्शन लगा दिया था। कुछ ही देर में बच्ची की मौत हो गई थी, जबकि यह क्लीनिक आयुर्वेदिक चिकित्सा के नाम से पंजीकृत थी। यहां अंग्रेजी दवाएं मरीजों को दी जा रही थीं। अभी भी इस क्लीनिक संचालक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। स्वास्थ्य महकमा सिर्फ जांच की बात कर रहा है।
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केस दो
जनपद मुख्यालय पर गैर पंजीकृत नर्सिंग होम में प्रसव के दौरान प्रसूता की जान चली गई थी। इसके बाद स्वास्थ्य महकमे को इस अवैध अस्पताल के विषय में पता चला, फिर उसे सील किया गया।
गैर पंजीकृत क्लीनिक व मेडिकल स्टोर संचालकों को थोक विक्रेता दवा नहीं बेच सकते। फिर भी उनके पास अंग्रेजी दवाएं आ रही हैं तो यह जांच का विषय है।-विनय मिश्रा, ड्रग इंस्पेक्टर।
आयुर्वेदिक चिकित्सक मरीजों को अंग्रेजी दवाएं नहीं दे सकते। छापामारी कर ऐसे चिकित्सकों पर कार्रवाई कराएंगे।-अमनदीप डुली, जिलाधिकारी।