ललितपुर। सुरक्षित प्रसव कराने व मातृ मृत्यु दर को घटाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से सेफ बर्थ रिस्पांस टीमें (एसबीआरटी) बनाई जाएंगी। साथ ही जनपद में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में हाई रिस्क प्रेगनेंसी क्लीनिक का संचालन व एसबीआरटी का गठन किया जाएगा। इससे हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को उचित इलाज मिल सकेगा।
कार्यक्रम के तहत प्रत्येक फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) पर सप्ताह में दो दिन हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं के लिए ओपीडी का संचालन किया जाएगा। यह ओपीडी सुबह दस बजे से शाम चार बजे तक संचालित की जाएगी। जिन दो दिनों में इस विशेष ओपीडी का संचालन किया जाएगा, उसकी जानकारी प्रत्येक आशा व एएनएम को दी जाएगी, जिससे ज्यादा से ज्यादा हाई रिस्क गर्भवती महिलाएं ओपीडी का लाभ ले सकें। इसके अलावा इस ओपीडी में न्यूनतम 30 महिलाओं की जांच करना आवश्यक रहेगा। दो दिन संचालित होने वाली इस विशेष ओपीडी में एक दिन ऑपरेशन थियेटर का संचालन भी किया जाएगा।
ओपीडी में आने वाली गर्भवती महिलाओं को तीन वर्गों में बांटा जाएगा, जिसके मुताबिक ही उन्हें इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। इन तीनों वर्गों में आने वाली गर्भवती महिलाओं की प्रसव की संभावित तिथि से पहले ही उनकी सघन निगरानी करना आवश्यक होगा।
सेफ बर्थ रिस्पांस टीमों का होगा गठन
इस योजना के तहत प्रत्येक एफआरयू पर सेफ बर्थ रिस्पांस टीमें (एसबीआरटी) बनाई जाएगी। इन टीमों में महिला चिकित्सक, निश्चेतना विशेषज्ञ व बाल रोग विशेषज्ञ शामिल होंगे। विशेषज्ञों की कमी होने पर निजी चिकित्सकों को इस टीम शामिल किया जा सकता है। टीम के सदस्यों के आने-जाने की व्यवस्था के लिए सरकारी वाहनों का इंतजाम किया जाएगा। इस योजना का मकसद प्रदेश की मातृ मृत्यु दर 258 प्रति लाख से घटाकर वर्ष 2017 तक 200 प्रति लाख करना है। इसके लिए गांवों में आयोजित होने वाले पोषण और स्वास्थ्य दिवस पर हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान की जाएगी। चिह्नित महिलाओं की जानकारी मदर चाइल्स ट्रैकिंग सिस्टम पर दर्ज करना आवश्यक होगा, जिससे इन गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर उचित इलाज उपलब्ध कराया जा सके। योजना के तहत हाई रिस्क गर्भवती महिला को सरकारी एंबुलेंस से एफआरयू पर इलाज कराना आवश्यक होगा। इसके तहत संबंधित जनपद की एफआरयू के अलावा दूसरे जनपद की एफआरयू पर भी प्रसव कराया जा सकेगा।
मातृत्व सुरक्षा दिवस से लें सबक
स्वास्थ्य विभाग की ओर से पिछले महीने हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान करने के लिए मातृत्व सुरक्षा सप्ताह का आयोजन किया गया था। योजना के तहत केवल खानापूर्ति की गई थी। पिछले सप्ताह बार ब्लॉक के टौरिया गांव की गर्भवती महिला अर्चना पुरोहित की प्रसव के दौरान मौत हो गई थी। परिजनों के हंगामा करने पर मौके पर पहुंचे एसडीएम सदर रमेश चंद्र को सीएमएस महिला डा. हरेंद्र चौहान ने बताया था कि यह मामला हाई रिस्क प्रेगनेंसी का था। इस कारण से महिला की मौत हो गई, जबकि उस महिला के एमसीपी कार्ड पर हाई रिस्क प्रेगनेंसी को चिह्नित करने वाली हाई रिस्क प्रेगनेंसी (एचपीआर) की लाल रंग की मुहर नहीं लगी थी। इस मुहर का मतलब कार्ड देखकर ही हाई रिस्क प्रेगनेंसी के मामले की जानकारी संबंधित चिकित्सक को हो जाती है। अगर मातृत्व सुरक्षा सप्ताह को गंभीरता से लिया गया होता, तो अर्चना की जान बच सकती थी।
हाई रिस्क प्रेगनेंसी क्लीनिक का संचालन कराने के लिए सारी तैयारियां की जा रही है। सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने के लिए पहले से भी कार्यक्रम संचालित है। जल्द की क्लीनिक का संचालन शुरू किया जाएगा।
- डा मुकेश चंद्र दुबे, मुख्य चिकित्सा अधिकारी