जनपद में विभिन्न विद्युत सब स्टेशनों पर ओवरलोड कम करने के लिए ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि करने के साथ ही विभाग द्वारा नए फीडरों का सृजन किया जा रहा है। इस क्रम में अधिकांश सब स्टेशनों पर दो से तीन नये फीडर बनाए जा रहे हैं।
ग्राम रोंड़ा स्थित 132 केवी विद्युत सब स्टेशन से जुड़े 33 व 66 केवी क्षमता के 14 सब स्टेशनों के माध्यम से शहरी, टाउन और ग्रामीण क्षेत्रों को बिजली आपूर्ति देकर करीब एक लाख घरों को रोशन किया जा रहा है। जबकि पांच नये विद्युत सब स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है। विभाग द्वारा एक ओर जहां नये सब स्टेशन बनाकर ओवरलोड कम करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, पूर्व से स्थापित पुराने विद्युत सब स्टेशनों पर ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि के साथ ही नये फीडरों का भी सृजन किया जा रहा है। शहर के गल्ला मंडी स्थित 66/33 केवी विद्युत सब स्टेेशन पर गत माह फीडर नंबर तीन को आधा करते हुए गोविंदनगर फीडर और फीडर नंबर एक को आधा कर पिसनारी नाम से नए फीडर बनाए गए। जबकि, बाईपास 33 केवी विद्युत सब स्टेशन से फीडर नंबर दो को हटाकर नझाई बाजार सब स्टेशन पर घंटाघर फीडर से जोड़ दिया गया। वहीं, ग्राम बिरधा स्थित 33 केवी विद्युत सब स्टेशन पर पहले पांच एमवीए और दस एमवीए का एक-एक ट्रांसफार्मर रखा हुआ है। ओवरलोड होने के चलते यहां अब दो दस एमवीए के ट्रांसफार्मर हो गए हैं। इसके साथ ही विभाग द्वारा खितवांस व पटऊआ नाम के दो नए फीडर बनाकर करीब आधा सैकड़ा गांवों को जोड़ दिया गया है।
इसी प्रकार सोजना में पूर्व में एक पांच एमवीए का ट्रांसफार्मर रखा हुआ था, जिससे ओवरलोड और लो-वोल्टेज की समस्या हो गई थी। इसके चलते विभाग द्वारा अब यहां एक और पांच एमवीए का ट्रांसफार्मर स्थापित करा दिया गया है। जिस पर अब सोजना में दो पांच एमवीए के ट्रांसफार्मर हो गए हैं। इसके साथ ही विभाग द्वारा यहां पूर्व से स्थापित सोजना व कुसमाड़ फीडरों को छोटा करते हुए दो नए फीडर बना दिए गए हैं, जिससे अब अन्य फीडरों पर अधिक लोड कम हो सके। इसके साथ ही दीनदयाल ग्रामीण ज्योति विद्युतीकरण योजना में भी कई सब स्टेशनों में नए विद्युत फीडर बनाए जाने का निर्णय लिया गया है, जिस पर शीघ्र ही काम शुरु हो सकेगा।
विद्युत सब स्टेशनों पर विभिन्न फीडरों पर ओवरलोड कम करने के लिए विभाग द्वारा नए फीडर बनाने का निर्णय लिया गया है। इससे सब स्टेशन पर ओवरलोड में वीसीबी व ओसीबी मशीनों के खराब होने का खतरा कम हुआ है, साथ ही फीडर छोटे होने से फाल्ट भी आसानी से मिल सकेगा।
प्रेमचंद, उपखंड अधिकारी तृतीय विद्युत।