ललितपुर (ब्यूरो)। परिषदीय विद्यालयों में गठित प्रबंध समितियों के चुनाव की निष्पक्षता पर अंगुलियां उठ रही हैं। इसके कारण कई विद्यालयों की समिति के चुनाव पर अंतिम मुहर नहीं लग पा रही है। इस समय जिले में करीब 10 विद्यालयों का चुनाव जांच के घेरे में है।
परिषदीय विद्यालयों के विकास में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने के मकसद से 15 सदस्यीय प्रबंध समिति का गठन किया जाता है। पहली बार इसका गठन वर्ष 2013 में किया गया था। नियमता समिति का कार्यकाल दो वर्ष रखा गया है। लेकिन, विभाग समितियों का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी समय से चुनाव नहीं करा सका। बीते माह शासन ने निर्णय लेते हुए समिति के चुनाव को हरी झंडी दे दी। जिस पर डीएम डा. रूपेश कुमार ने निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रत्येक स्कूल में नोडल अधिकारी नामित कर दिए। तमाम विद्यालयों में नोडल अधिकारी व्यस्तता के चलते चुनाव के समय नहीं पहुंचे, जिससे कई जगह चुनाव में विवाद की स्थिति बन गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों ने ग्राम प्रधान की सहमति से मनमाफिक अध्यक्ष का चुनाव करा लिया। बीएसए संतोष कुुमार राय ने चुनाव की हकीकत तक पहुंचने के उद्देश्य से सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से समिति के गठन की सूचना तलब की। इस दौरान कई विद्यालयों के चुनाव का विवाद सामने आया है। विशेषकर ब्लाक मड़ावरा के लखंजर का चुनाव सुर्खियों में है। इस विद्यालय में तीसरी बार चुनाव की नौबत है। हालांकि इस पर आखिरी निर्णय बीएसए को ही लेना है।
इतने रहेंगे एसएमसी सदस्य
स्कूल प्रबंध समिति में कुल 15 सदस्य होंगे। इसमें ग्राम प्रधान द्वारा नामित सदस्य, डीएम द्वारा नामित लेखपाल, नर्स/एएनएम, प्रधानाध्यापक व ग्यारह अभिभावक सदस्य। खास बात यह है कि अभिभावकों में 50 प्रतिशत पुरुष व इतनी ही महिलाओं को स्थान दिया जाएगा। 11 अभिभावकों में अनुसूचित जाति, जन जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, बीपीएल वर्ग के कम से कम एक-एक सदस्य शामिल किए जाएंगे। चयनित सदस्यों में एक अध्यक्ष व एक उपाध्यक्ष होगा।
करीब 40 जगहों पर हुए दोबारा चुनाव
विद्यालय प्रबंध समितियों का चुनाव ग्राम प्रधान के चुनाव से कमतर नहीं रहा है। इसकी वजह विद्यालय प्रबंध समितियों को वित्तीय अधिकार दिया जाना है। समिति दो साल के कार्यकाल में लाखों रुपये विद्यालय के विकास पर खर्च करती है। इसके अलावा यूनिफार्म वितरण मद भी है।
जिले में 99 प्रतिशत विद्यालयों में समितियों का गठन हो चुका है। शेष जगहों पर विवाद की स्थिति है। यदि किसी विद्यालय में तीसरी बार भी चुनाव की स्थिति बनेगी तो वहां चुनाव कराए जाएंगे।
संतोष कुमार राय, बीएसए ललितपुर।