ललितपुर। जिला कारागार में निरुद्ध आठ बंदियों में मानसिक तनाव के लक्षण सामने आए हैं। इनकी काउंसलिंग कर मानसिक स्थिति में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए काउंसलर हर सप्ताह जेल पहुंचते हैं। जरूरत पड़ने पर मनोचिकित्सक को भी बुलाकर उपचार कराया जाता है।
जिला कारागार में करीब 250 बंदियों को रखने की क्षमता है, जबकि वर्तमान में लगभग 400 बंदी निरुद्ध हैं। इनमें सजायाफ्ता और विचाराधीन दोनों तरह के बंदी शामिल हैं। परिवार से दूर रहने, मुकदमों की सुनवाई में देरी और भविष्य की चिंता जैसी परिस्थितियां कुछ बंदियों में मानसिक तनाव का कारण बन रही हैं। लंबे समय तक तनाव बने रहने से अवसाद की समस्या भी हो सकती है।
बंदियों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए कारागार के भीतर अस्पताल है, जहां तैनात चिकित्सक उनका उपचार करते हैं। गंभीर हालत होने पर बंदियों को मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। वहीं, मानसिक तनाव से जूझ रहे बंदियों की पहचान कर उनकी काउंसलिंग कराई जा रही है। इस दौरान उनकी समस्याएं समझने और तनाव से उबरने में मदद दी जाती है। जेल प्रशासन ऐसे बंदियों के स्वास्थ्य और गतिविधियों पर भी नजर रख रहा है।
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जिला कारागार में करीब सात से आठ बंदी मानसिक तनाव से ग्रसित हैं। काउंसलर हर सप्ताह आकर उनकी काउंसलिंग करते हैं। अवसाद से ग्रसित बंदियों के उपचार के लिए जरूरत पड़ने पर मनोचिकित्सक को ऑन कॉल बुलाया जाता है। बंदियों के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
प्रशांत उपाध्याय, प्रभारी जेल अधीक्षक