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सजदे में झुके सिर, लाखों ने अदा की नमाज

Wed, 14 Sep 2016 02:23 AM IST
lalitpur
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त्‍याेहार - फोटो : amar ujala
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ललितपुर। मुस्लिम समुदाय द्वारा कुर्बानी का त्यौहार ईद-उल-जुहा हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। ईदगाह और जामा मस्जिद समेत शहर की अन्य मस्जिदों में भी नमाज अदा की गईं।   
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मुस्लिम समुदाय का खास त्यौहार ईद-उल-जुहा बड़े ही उत्साह व आस्था के साथ मनाया गया। मुस्लिमों द्वारा मंगलवार की सुबह सबसे पहले साढ़े आठ बजे ईदगाह पर नमाज अदा की गई। इसके बाद शहर की अन्य मस्जिदों में पौने नौ बजे नमाज अदा हुई। दो रकात की नमाज के बाद खुतबा पढ़ा और इसके बाद दुआ हुई। पर्व को लेकर समुदाय के लोगों में खासा उत्साह देखा गया। नमाज अदा करने के बाद समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी। यहां मौजूद अन्य समुदाय व संगठनों के अलावा प्रशासनिक अधिकारियों ने समुदाय के लोगों से मिलकर गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी। मस्जिदों में नमाज अदा करने के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने घरों में परंपरा अनुसार बकरीद पर बकरों की कुर्बानी दी गई और एक दूसरे को दावत भी दी और एक-दूसरे के घर जाकर ईद की मुबारकबाद देकर खुशियां मनाईं। इस मौके पर जिलाधिकारी डॉ. रुपेश कुमार, पुलिस अधीक्षक डी. प्रदीप कुमार, शहर पेश इमाम हाजी अब्दुल अलीम, मुस्लिम एसोसिऐशन सदर असलम कुरैशी, उर्स कमेटी सदर हाजी बाबू बदरुद्दीन कुरैशी, नपाध्यक्ष सुभाष जायसवाल, नगराध्यक्ष अजीज कुरैशी, प्रेस क्लब महामंत्री मुहम्मद नसीम, नायब सदर अब्दुल रहमान कल्ला, रमजानी दादा, अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर, उपजिलाधिकारी सदर रमेश चंद्र तिवारी, अपर पुलिस अधीक्षक सुधा सिंह, क्षेत्राधिकारी सदर बल्देव सिंह , शहर कोतवाल अजय पाल, हाजी साबिर अली, अबरार अली, रिजवान उज्जमा, राजेश यादव, कमरुद्दीन कप्तान, मनीष अहमद कादरी, शेख नबाब बख्स, जलील बख्श, अनस खान, खलील हुसैन, कलीम हुसैन, हाजी इरशाद खान, मु.नसीर, मु.आदिल, अरशान बख्श, फहीम खां, जीशान, इमरान आदि उपस्थित रहे।

इसलिए दी जाती है कुर्बानी
ललितपुर। मुस्लिम समुदाय में बकरीद पर बकरे की कुर्बानी दी जाती है। इस दिन बकरे की कुर्बानी वही देता है जो किसी भी प्रकार से कर्जदार न हो या फिर उस पर किसी प्रकार की जिम्मेदारी न हो। कुर्बानी देने वाला हर फर्ज पूरे कर चुका हो। ऐसा कहा जाता है कि एक बार हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने ख्वाब देखा कि वह अपने बेटे हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम को जिबह कर रहे हैं। इसी ख्वाब को अल्लाह का हुक्म जानकर हजरत इब्राहिम बेटे को जिबह करने के लिए ले गए। उन्होंने अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर अल्लाह की राह में बेटे को कुर्बान करने को जैसे ही उसकी गर्दन पर छुरी चलाई, तभी अल्लाह के हुक्म से फरिश्ते हजरत जिबाइल ने बेटे इस्माइल की जगह दुम्बा रख दिया। उनकी जगह दुम्बा जिबह हो गया। हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की यह अदा अल्लाह को पसंद आई। तब से यह बकरीद के मौके पर कुर्बानी का रिवाज मनाने की परंपरा है।
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