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डंपिंग ग्राउंड फुल, कहां जा कचरा

Thu, 19 Jan 2017 12:55 AM IST
lalitpur
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डंप‌िंग ग्राऊंड - फोटो : amar ujala
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शहर से हर रोज करीब पांच मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इस कचरे को नगर पालिका एकत्रित करके मुहल्ला रामनगर में स्थित डंपिंग ग्राउंड पर डंप कराती है। लेकिन इस कचरा के निस्तारण के लिए नगर पालिका के पास न तो कोई उचित संसाधन है और न ही कोई कार्य योजना तैयार है, जिससे डंपिंग ग्राउंड पूरी तरह से भर चुका है और आसपास रहने वाले लोगों को कचरे की बदबू और मच्छर-मक्खियों के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।   
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मुहल्ला रामनगर में करीब ढाई-तीन एकड़ जमीन में बना नगर पालिका का टिचिंग ग्राउंड वर्षों पुराना है। नगर क्षेत्र से हर रोज निकलने वाले पांच मैट्रिक टन कचरे को वर्षों से यहीं एकत्रित किया जा रहा है, लेकिन इस कचरा के निस्तारण के लिए कोई सुनिश्चित व्यवस्था नहीं होने के कारण यह ग्राउंड पूरी तरह भर गया है। कचरा निस्तरण के लिए जनपद में सोलिड वेस्ट मेंनिजमेंट प्लांट स्थापित नहीं है, साथ ही नगर पालिका द्वारा कोई अन्य तरीका भी नहीं अपनाया जा रहा है। नगर पालिका यदि अन्य शहरों की नगर पालिका व नगर निगमों से सीख ले तो शहर के इस कचरे का निस्तरण भी किया जा सकता है। वर्तमान में घरों से निकलने वाले कचरा, और नाले-नालियों से निकलने वाली सिल्ट को एक साथ ही एक ही वाहन में भरकर एक ही स्थान पर एक साथ डंप किया जा रहा है। इस कारण घरों से निकलने वाले कचरे जैसे सड़ी-गली सब्जियां, खराब खाना, फलों के छक्कल आदि नीले कचरे को उपयोगी नहीं बनाया जा पा रहा है। यदि इस कचरे का घरों, सब्जी मंडियों व बाजार से एकत्रित करके एक अलग स्थान पर डंप किया जाए तो इस कचरे का उपयोग कंपोस्ट खाद्य बनाने में किया जा सकता है और इस खाद्य को नीलाम करके विभाग की आय में भी बढ़ोत्तरी हो सकती है। इससे पूर्व में नगर पालिका द्वारा खाद्य के लिए उपयोगी कचरे को नीलाम किया भी गया है, लेकिन वर्तमान में बढ़ रही प्लास्टिक की सामग्री व पॉलिथीनों की भरमार के कारण अब यह कचरा किसी उपयोग के लायक नहीं कर गया है।      

इस तरीके से हो सकती है व्यवस्था      
नगर पालिका चाहे तो मुहल्लों में कचरा कलैक्शन के लिए अलग-अलग डस्टबिन की व्यवस्था कर सकती है, जिससे घरों से निकलने वाले गीले (बायोमैट्रिक) व सूखे (अनबायोमैट्रिक) कचरे को अलग-अलग स्टोर कर सकती है। लेकिन नगर पालिका कुछ सार्थक प्रयास की करना नहीं चाहती है। बीते माह ही नगर पालिका ने करीब 70 लाख रुपये की लागत से खरीदी गई दस कवर्ड आपे गाड़ियों को डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए शहर की सड़कों पर उतारा। लेकिन इन आपे में भी गीला व सूखा कचरा कलेक्शन के लिए अलग-अलग व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा लाखों रुपये की लागत से प्लास्टिक के करीब 80 डस्टबिन भी खरीदे हैं, तो एक ही रंग के तो है ही साथ ही बीते कई महिनों से विभाग के स्टोर में पड़े-पड़े धूल फांक रहे हैं।      
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स्थानीय परिवारों को होने लगी समस्या      
मुहल्ला रामनगर में करीब ढाई-तीन एकड़ जमीन में बना नगर पालिका का डंपिंग ग्राउंड वर्षों पुराना है। पहले यहां पर आबादी नहीं थी, लेकिन विकास की तेज रफ्तार में अब यहां पूरा मुहल्ला बस गया है और आधा सैकड़ों से अधिक परिवार निवास करने लगे हैं। नगर क्षेत्र से हर रोज निकलने वाले पांच मीट्रिक टन कचरे को वर्षों से यहीं एकत्रित किया जा रहा है। ग्राउंड पर कचरे के ढेरों की ऊंचाई भी इतनी अधिक हो गई है कि यदि नगर पालिका के वाहन कचरा फेंकने के लिए ग्राउंड के अंदर तक जाते हैं तो ऊपर से निकले बिजली के हाईटेंशन ताल की चपेट में आकर कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है। अंदर तक नहीं जा पाने के कारण ग्राउंड के बाहर तक कचरा एकत्रित हो गया है। वर्षों से जमा इस कचरे की बदबू और इसमें पनपने वाले मच्छरों-मक्खियों के कारण आस-पास करने वाले लोगों को काफी समस्या होने लगी है।      

यहां एकत्रित कचरे के कारण दूर-दूर तक बदबू आती है। जिससे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मैदान के अंदर जगह नहीं होने के कारण नजदीक में ही कचरा फेंका जा रही है, जिससे मुश्किलें और भी अधिक बढ़ गई है।      
संतोष कुशवाहा, स्थानीय निवासी      

बदबू, मच्छरों व मक्खियों के कारण काफी परेशानी होती है। इससे छोटे-छोटे बच्चे तो हमेशा ही बीमार बने रहते हैं।      
विमला कुुशवाहा, स्थानीय निवासी      

गंदगी व बदबू से पूरा मुहल्ला परेशान है। साथ ही इस गंदगी के कारण सुअरों को भी क्षेत्र में जमकर आतंक है, जिस कारण समस्या होती है।      
नरेश, स्थानीय निवासी      
     
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को जमीन का इंतजार      
भारत सरकार द्वारा शहरी क्षेत्रों की कायाकल्प करने और शहर को साफ व स्वच्छ बनाने के लिए चलाई जा रही अमृत योजना व स्वच्छ भारत मिशन इन दोनों की योजनाओं में शहर के कचरा निस्तरण और डूर-टू-डोर कचरा कलेक्शन को प्राथमिकता से लिया गया है। अमृत योजना के तहत भी सभी जनपदों में कचरा निस्तारण के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित कराए जा रहे हैं। इसके लिए सभी नगरीय निकायों से लगातार प्रस्ताव भी मांगे जा रहे हैं। लेकिन नगर पालिका व जिला प्रशासन अभी तक इस प्लांट के लिए जमीन की तलाश नहीं कर पाया है। शासनादेश के अनुसार प्लांट के लिए जमीन उपलब्ध कराने की जिम्मेवारी जिलाधिकारी की है, लेकिन पिछले कई माह से यह मामला ठंडे बस्ते में डला हुआ है। धरातल पर इस योजना की प्रोसेस शून्य स्तर पर बनी हुई है। इस प्लांट को स्थापित कराने के लिए करीब 30 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, जिसमें पूरे जनपद से निकले वाले कचरे का निस्तरण किया जा सके।       

सॉलिड वेस्ट प्लांट के लिए जगह तलाशी जा रही है, जगह मिलते ही शासन को प्रस्ताव भेज दिया जाएगा। इसके अलावा शहर से गीले व सूखे कचरे का अलग-अलग कलेक्शन कराने की बात है, तो यह बिना संसाधनों के संभव नहीं है। इसके लिए अलग से वाहनों की आवश्यकता पड़ेगी और घर-घर में दो तरीके से डस्टबिन रखवाने पड़ेगें। हाल में तो विभाग वैसे भी बजट की कमी से जूझ रहा है तो यह संसाधन उपलब्ध करा पाना वर्तमान में संभव नहीं है। लेकिन इसके लिए आने वाले समय में प्रयास किए जाएंगे।      
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राकेश कुमार       
अधिशाषी अधिकारी, नगर पालिका ललितपुर।
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