बृहस्पतिवार को गल्ला मंडी बंद रही। इस कारण लाखों का कारोबार प्रभावित हुआ। वहीं
गल्ला व्यापारियों ने निकासी की सीमा पचास हजार रुपए प्रतिदिन की जगह पांच लाख रुपए तक करने पर ही व्यापार शुरु किए जाने का निर्णय लिया है।
बृहस्पतिवार को मंडी में सन्नाटा पसरा रहा। व्यापारियों ने पांच सौ व एक हजार रुपए के नोट बंद होने के चलते किसानों के मंडी में न आने के कारण बंदी का निर्णय लिया। बृहस्पतिवार को कुछ किसान मंडी पहुंचे भी तो उन्हें वापस लौटना पड़ा।
मालूम हो कि गल्ला मंडी में रोजाना करोड़ों रुपए का कारोबार होता है। कई व्यापारी ऐसे हैं, जिनकी दुकानों पर ही रोजाना करोड़ों का व्यापार होता है। वर्तमान में उड़द ही करीब 5700 से 6000 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से चल रही है। मंडी में बड़े व्यापारी के यहां ही करीब छह सौ से सात सौ क्विंटल तक उड़द आ जाती है, जिस पर उस व्यापारी को किसानों को करीब चालीस लाख रुपए तक उपलब्ध कराने होंगे, जो बैंक से रुपए की निकासी बढ़ाए बिना संभव नहीं है। इसके अलावा कई आढ़तियों की दुकानों पर ही दस से पंद्रह पल्लेदार काम करते हैं, जिनको ही व्यापारी को एक दिन में ही हजारों रुपए देने होते हैं। वहीं टैक्सी भाड़ा, माल की ट्रकों में लोडिंग के लिए ही एडवांस में 25 प्रतिशत देना होता है। इस प्रकार एक बड़े व्यापारी को एक दिन में करीब दो से ढाई लाख रुपए तक का खर्चा कारोबार सुचारु रखने के लिए करना होता है।
गल्ला व्यापारियों को कहना है कि सरकार द्वारा अभी पचास हजार रुपए की लिमिट देकर राहत देने का प्रयास तो किया गया है, लेकिन इस राशि से गल्ला व्यापार का संचालन संभव नहीं है। गल्ला कारोबार तभी शुरु हो सकता है या तो जब किसान चेक से रुपए लेने लगे या फिर बैंकों में एक दिन में कम से कम गल्ला व्यापारियों के लिए पांच लाख रुपए तक की निकासी शुरु कर दी जाए। वहीं गल्ला मंडी स्थित स्टेट बैंक में पचास हजार रुपए निकासी भी शुरु नहीं हो सकी है, जिससे व्यापारी परेशान हैं।
इतने से व्यापार चलना मुश्किल
ललितपुर। गल्ला व्यापारी मनोज कुमार ने बताया कि पचास हजार रुपए की लिमिट से गल्ला व्यापार चलना मुश्किल है। 24 नवंबर का व्यापारी इंतजार कर रहे हैं, जिसमें अभी बैंक से निकासी बढ़ाने की उम्मीद है। निकासी बढ़ने पर ही कारोबार चल सकेगा।
किसान को देने को पचास हजार नाकाफी
ललितपुर। गल्ला व्यापारी विपिन पांडे ने कहा कि सरकार द्वारा पचास हजार बैंक से निकासी करने से गल्ला व्यापार में राहत नहीं है, किसानों को देने के लिए पचास हजार रुपए नाकाफी हैं। कम से कम पांच लाख रुपए की निकासी प्रतिदिन किए जाने पर ही व्यापार संचालित हो सकेगा।
पचास हजार की लिमिट से राहत नहीं
ललितपुर। गल्ला व्यापारी रामकुमार साहू ने कहा कि बड़े व्यापारियों के लिए इतने से राहत नहीं मिलेगी। सरकार का निर्णय तो अच्छा है, लेकिन जिंस बेचने पर किसान व्यापारियों से तत्काल रुपए मांगता है और रुपए नहीं देने पर वापस भी लौट जाता है, ऐसे में सरकार को व्यापारियों को खाते से रुपए निकालने की लिमिट बढ़ानी चाहिए, ताकि व्यापार फिर से शुरु हो सके।