डोंगराखुर्द (ललितपुर)। कभी डोंगराखुर्द गांव और इसके आसपास के गांवों के लिए प्रमुख जलस्रोत रहा ऐतिहासिक डाेंगरा तालाब अब अपने ही पानी से इन गांवों में तबाही मचा सकता है। दरअसल पानी रोकने के लिए इसके किनारों पर लगे पत्थर अराजक तत्वों ने चुरा लिए हैं। ऐसे में बारिश का पानी आने से तालाब ओवरफ्लो होने लगा है। ग्रामीणों की सूचना पर एसडीएम और तहसीलदार ने मौके का निरीक्षण किया है।
कभी अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के कारण सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा डोंगरा तालाब अपने ही लोगों की अनदेखी से अस्तित्व खोता जा रहा है। तहसील पाली के ग्राम डोंगराखुर्द से ग्राम पटना तक करीब एक किलोमीटर के दायरे में पसरा यह ऐतिहासिक तालाब सिंचाई विभाग की अनदेखी का शिकार हो गया है। तालाब से अराजक तत्वों ने पत्थर निकाल लिए हैं। लेकिन सिंचाई विभाग ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। डोंगरा तालाब से करीब 15 सौ एकड़ खेती की सिंचाई होती थी।
लेकिन अब मात्र तीन सौ एकड़ जमीन की सिंचाई हो रही। तालाब देखरेख के अभाव में सुंदरता खोता जा रहा है। पानी बाहर जाने से रोकने के लिए इसके किनारों पर लगे पत्थरों के हटने से तालाब फटने की आशंका बढ़ गई है। शुक्रवार को तालाब के ऊपर से पानी निकल गया। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि तालाब फटा तो करीब एक दर्जन गांव इसके पानी की चपेट में आ सकते हैं।
ग्रामीणों ने तालाब का पानी बाहर निकलने की सूचना एसडीएम प्रदीप कुमार को दी है। इस पर एसडीएम एवं तहसीलदार अरूण कुमार श्रीवास्तव ने तालाब पर पहुंचकर मुआयना किया। सिंचाई विभाग के जेई एसबी शर्मा ने बताया कि तालाब के जीर्णोद्धार के लिए 11 लाख रुपए का प्रस्ताव भेजा है। बजट मिलते ही काम शुरू हो जाएगा। इस मौके पर हरीराम दुबे, राजाराम तिवारी, लबीराजा, चन्द्रभान सिंह, जितेंद्रा राजा, बीर सिंह आदि मौजूद रहे।