- पशु विभाग की गणना के अनुसार हैं 1923 कुत्ते, आए दिन करते हैं हमला
- अबतक नगर निकायों में एक भी नहीं हुआ पंजीकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। शासन ने कुत्तों को पालने के लिए नियम बनाए हैं, जिनके पालन कराने की जिम्मेदारी नगर निकायों को दी गई है। लेकिन, अनदेखी के चलते नियमों का धरातल पर पालन नहीं हो रहा है। यहां पर लोग कुत्ते तो पाले हैं लेकिन, पंजीयन के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। इससे कुत्तों के काटने पर मालिकों पर कार्रवाई नहीं हो पाती है।
कुत्ताें के काटने की घटनाओं को देखते हुए शासन ने पालने के लिए नियम बनाए हैं। कुत्ता पालने के लिए एक वर्ष का लाइसेंस मिलेगा। लाइसेंस वैध रहने के दौरान एंटी रेबीज वैक्सीनेशन की वैधता समाप्त होने पर लाइसेंस स्वत: ही निरस्त होगा। कुत्ते के व्यवहार के लिए मालिक को ही जिम्मेदार माना जाएगा। पालतू कुत्ते से किसी को परेशानी नहीं होगी, इसका शपथ पत्र देना होगा। शपथ पत्र में कुत्ते बाहर ले जाते समय जंजीर से बांधकर रखने का भी जिक्र करना होगा। सार्वजनिक स्थल पर नित्यक्रिया करने की स्थिति में मालिक जिम्मेदार होगा। प्रतिवर्ष टीकाकरण व एक वर्ष की आयु होने पर नसबंदी भी करवाना होगी। नियमों को न मानने वाले मालिकों का कुत्ता जब्त किया जाएगा। आलम यह है कि अबतक किसी ने भी कुत्तों को पालने के लिए पंजीकरण नहीं कराया है। इस संबंध में दिनेश कुमार विश्वकर्मा, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद ने बताया कि शहर में वर्तमान में कुत्ताें के पंजीयन नहीं हो रहे हैं। आश्रय स्थल निर्माण की तैयारियां चल रही हैं, जल्द ही पंजीयन व लाइसेंस जारी किए जाएंगे।
आश्रय गृह न होना बनी समस्या
जनपद में पशु विभाग की गणना में भले ही 1923 कुत्तों की संख्या बताई गई हो, लेकिन धरातल पर संख्या कई गुना बनी हुई है। इसका खुलासा शहर से लेकर गांव में घूम रहे कुत्तों के झुंड को देखकर लगाया जा सकता है। हद तो तब हो गई, जब जिले में प्रतिमाह कुत्ते 800 से 900 लोगों को निशाना बना रहे हैं, इसके बाद भी इन्हें संरक्षित करने लिए आश्रय स्थल नहीं बन सका है। न ही इनका टीकाकरण किया जा रहा है।