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चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए बने कानून

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doctor.jpg - फोटो : doctor.jpg
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ललितपुर। चिकित्सकों के साथ हो रही हिंसक घटनाओं को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही कलेक्ट्रेट पहुुंचकर विभागों को लेकर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। पुलिस अधीक्षक से चिकित्सकों की सुरक्षा किए जाने की मांग की है।
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शुक्रवार को घंटाघर पर आईएमए के पदाधिकारियों ने चिकित्सकों के साथ हो रही मारपीट व आपराधिक घटनाओं को लेकर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। जहां से वाहनों द्वारा तुवन चौराहे पहुंचकर प्रदर्शन किया। इस दौरान एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि कोविड जैसे महामारी काल में चिकित्सकों का अहम योगदान दिया है। इसका श्रेय सरकार को नहीं चिकित्सकों को जाना चाहिए। चिकित्सक लगातार लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का कार्य करते हैं। आने वाले मरीजों को स्वास्थ्य करने का प्रयास करते हैं। इसके बाद भी चिकित्सकों को सुरक्षा व्यवस्थाएं मुहैया नहीं हो पा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले दो सप्ताह में असम, विहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और कई अन्य जगहों पर चिकित्सकों और स्टाफ के साथ हिंसा की घटनाएं हो चुकी है।
कई चिकित्सक गंभीर रूप से घायल हुए, महिला चिकित्सकों के साथ भी गाली-गलौज जैसी घटनाएं हुए हैं। जिसका एसोसिएशन विरोध करती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में केंद्र सरकार ने चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर कानून बनाया, लेकिन आईपीसी की धाराओं के न जोड़ने से कार्रवाई नहीं हो पाती है। इससे चिकित्सक असुरक्षित बने हुए हैं। उन्होंने आईपीसी की धाराओं को जोड़े जाने की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री व मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में मांग की है कि स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को तत्काल सुरक्षा मुहैया कराई जाए। केंद्रीय अस्पताल और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स सुरक्षा अधिनियम में आईपीसी की धारा और आपराधिक गतिविधि संहिता शामिल कराई जाए। प्रत्येक अस्पताल की सुरक्षा के मानक बढ़ाए जाएं। अस्पताल को सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाए। दोषियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक अदालत में सुनवाई और सख्त सजा दिलाने का प्रावधान की व्यवस्था की जाए। वही पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर चिकित्सकों की सुरक्षा की मांग की। अंत में कोरोना में मरीजों की सेवा के दौरान संक्रमित होकर जंग हार गए चिकित्सकों को श्रद्धाजंलि दी। हालांकि कोविड जैसे महामारी को देखते हुए ओपीडी और इमरजेंसी जैसी सेवाएं जारी रखीं। इस दौरान अध्यक्ष डा. राजकुमार जैन, डॉ. आरके अग्रवाल, डॉ. एस कौर, डॉ. शोभा जैन, डॉ. एनके जैन, सचिव डॉ. विकास जैन, डॉ. एनसी जैन, डॉ. आरपी श्रीवास्तव, डॉ. एके दिवाकर, डॉ. अनुपम मिश्रा, डॉ. डीके राज, डॉ. अनिता जैन, डॉ. आकाश खैरा, डॉ. अजय जैन, डॉ. सुधीर नजा, डॉ. महेंद्र जैन, डॉ. विजय द्विवेदी, डॉ. आलोक जैन मौजूद रहे।
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