जिले में दो दर्जन से अधिक होटल, रेस्टोरेंट व लॉज, 23 पेट्रोल पंप, 53 विभिन्न बैंक शाखाएं, करीब 150 आटा चक्की अथवा इंडस्ट्रीज और बड़े दुकानदारों समेत कुल मिलाकर 4,500 कॉमर्शियल उपभोक्ताओं द्वारा बिजली का उपभोग किया जा रहा है। कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को विद्युत विभाग एक किलोवाट के संयोजन पर 700 रुपये की रसीद काटता है। इसके बाद प्रति किलोवाट के हिसाब से 50 रुपये से अधिक के चालान की रसीद काटी जाती है। इसी प्रकार पावर संयोजन धारकों को भी एक किलोवाट से दस किलोवाट के लिए 1,200 रुपये, 10 किलोवाट से 20 किलोवाट तक के लिए 1,425 रुपये, 20 से 30 किलोवाट के लिए 2,150 रुपये और इससे अधिक के संयोजन पर सुरक्षा निदेशालय द्वारा संयोजन वाले स्थान और संयोजन के लिए मानकों को पूरा करने के उपरांत सेफ्टी सर्टीफिकेट जारी किया जाता है। इसके बाद ही विद्युत विभाग ऐसे उपभोक्ताओं को संयोजन जारी करता है।
इसके अलावा किसी भी ऐसे संयोजनों को देने से पूर्व मानक के अनुसार बायरिंग होनी चाहिए। वहीं, 10 किलोवाट से अधिक के संयोजन लेने पर स्टार्टर के पास 440 वोल्ट लिखा हुआ एक बोर्ड लटकाना जरूरी होता है। सबसे अधिक जरूरी कनेक्शन के दौरान उक्त संयोजन के लिए चार फुट गड्ढे में कोयला भरकर कॉपर का अर्थ बायर लगाना होता है, लेकिन अधिकांश होटलों या फिर अन्य बड़े संस्थानों में बिजली संयोजन लेने के दौरान ऐसे मानकों की अनदेखी की जाती है। संस्थानों में विद्युत केबलों के लिए पाइप लगाने होते हैं। इसके अलावा आग से बचाव को अग्निरोधक यंत्र आवश्यक रूप से उपलब्ध होना चाहिए। इसके लिए सुरक्षा निदेशालय द्वारा अनुमति दी जाती है। इसके बिना संयोजन की अनुमति प्राप्त नहीं होती है।
जानकारों के अनुसार अर्थ प्रोटेक्शन की अनदेखी के कारण अधिकांश संस्थानों में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगती है। यहां तक कि तारों का गेज भी मानक के अनुसार और सभी उपकरण आईएसआई मार्क के लगे होना जरूरी होते हैं, लेकिन सुरक्षा संबंधी नियमों को ताक पर रखकर धज्जियां उड़ायी जा रही हैं। जनपद में अधिकांश ऐसे उपभोक्ताओं द्वारा विद्युत कनेक्शन के दौरान औपचारिकताएं पूर्ण व सही दिखा दी जाती हैं, लेकिन संयोजन होने के बाद सुरक्षा नियमों को अनदेखा कर दिया जाता है। यही कारण है कि बड़े संस्थानों में शॉर्ट सर्किट होने से आग लग जाती है और आग बुझाने के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण यह विकराल हो जाती है, जिससे बड़ा हादसा घटित हो जाता है।