काका ललितपुरी के निवास पर हिंदी, उर्दू अदबी संगम के बैनर तले कवि सम्मेलन और मुशायरा आयोजित किया गया। इस दौरान शायरों व कवियों को स्मृति चिह्न भेंटकर उन्हें सम्मानित किया गया। वरिष्ठ कवियत्री सुमनलता शर्मा चांदनी ने गीत की पंक्तियां पढ़ी, जिसमें कहा कि बोझ नहीं समझो बेटी को बेटी है वरदान, त्याग तपस्या प्रेम से रखती सबका ध्यान। जिसे खूब पसंद किया गया।
अशोक क्रांतिकारी ने समाज पर व्यंग्य कसते हुए पंक्तियां पढ़ी। दशरथ प्रसाद पटेल परदेशी ने गजल पढ़ते हुए कहा कि किस्मत में जो होता है वो मिलता है साहब, तेरे बिन पत्ता भी नहीं हिलता है साहब। गीतकार प्रशांत श्रीवास्तव ने गीत पेश किया। युवा शायरा सोनियां प्रभाकरन शबनम ने गजल पढ़ी, जिसमें कहा कि मौसमी परिन्दें जो दिल को खूब भाते हैं, चार दिन हंसाकर ये उम्र भर रुलाते हैं। रामकृष्ण कुशवाहा ने गजल पढ़ी, जिसमें कहा कि जिंदगी के सफर में कुछ लोग यादें हो जाते हैं, जिन्हें हम भूलनपा चाहें वो अक्सर याद आते हैं, उम्र बहुत कम है गुलशन में खिले हुए फूलों की, फूल मुरझा गए तो भी वो खुशबू लुटाते हैं। किशन सिंह बंजारा ने सुनाया कि शरीफ इंसान को तुमने दोस्त जोकर बना दिया, कल तक घर का मालिक था बीबी ने नौकर बना दिया। काका ललितपुरी व रामस्वरूप नामदेव ने भी शेर पढ़ा। इस मौके पर सरवर हिंदोस्तानी, श्यामलाल, अशोक कुमार अहिरवर, कुसमलता सोनी, शिवनारायण वर्मा, सुदामा देवी, राजकुमारी, सोनाली, त्रिवेणी देवी, रामसेवक वर्मा, धर्मराज यादव, जितेंद्र, मीना कुशवाहा, संगीता जैन, क्रांति कुशवाहा, आरती, आशा, घनश्याम दास, मनीष कुशवाहा, हरगोविंद अहिरवार, राजाराम खटीक, नंदलाल आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता किशन सिंह बंजारा व संचालन संस्था अध्यक्ष रामकृष्ण कुशवाहा ने किया।