संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। रबी की फसल कटाई के बाद अब किसान खेतों की गहरी जुताई करे दें, ताकि कम लागत में अधिक उत्पादन हो सके। कतार में फसलों की बुवाई, फसल चक्र, सहफसली खेती, ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई करने से कम लागत में अधिक उत्पादन मिलता है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि हल्की बारिश होने से खेतों में नमी आ गई है, ऐसे में गहरी जुताई करें, इससे फसलों में रोग व कीट लगने की संभावना कम होती है।
ग्रीष्मकालीन जुताई मानसून आने से पहले की जाती है। इस समय जुताई के अधिक फायदे होते हैं। गहरी जुताई से जल, वायु और मिट्टी का प्रदूषण कम हो जाता है। खेत की मिट्टी में सुधार होता है, पानी धारण करने की क्षमता बढ़ जाती है। जुताई से खेत में उगे खरपतवार और फसल अवशेष मिट्टी में दबकर सड़ जाते हैं, जिससे मिट्टी में जीवांश की मात्रा बढ़ जाती है और यह खाद के रूप में भी कार्य करती है। जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार भारतीय ने बताया कि गर्मी में गहरी जुताई के बाद मिट्टी में पाए जाने वाले हानिकारक जीवाणु, कवक आदि पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं।