अगले माह से अवैध खनन को प्रपत्र एमएम-11 का सहारा नहीं मिल सकेगा। शासन ने प्रदेश में खनिज पट्टा धारकों द्वारा खनिज परिवहन करने वाले वाहनों के साथ उपयोग होने वाले मुद्रित प्रपत्र एमएम-11 को अब ऑनलाइन कर दिया है। इसे एक अगस्त से पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा। खनिज पट्टेधारकों को ऑनलाइन डाटा बेस तैयार करने के लिए डीएम ने संबंधित डाटा व प्रपत्र 15 जुलाई तक कलेक्ट्रेट खनिज अनुभाग कार्यालय में जमा करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
सरकार प्रदेश में अवैध खनन पर अंकुश लगाने और खनिज विभाग में पारदर्शिता लाने के लिए तमाम प्रयास कर रही है। बीते माह शासन की मंशा के अनुरूप खनिज विभाग द्वारा बालू के घाटों के परमिट जारी करने के लिए ई-टेंडरिंग प्रक्रिया अपनाई गई थी। इसी क्रम में अब शासन ने अवैध खनन के परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए ई-अभिवहन (ई-एमएम-11) की व्यवस्था लागू कर दी है। इसको एक अगस्त से प्रभावी करने के लिए शासन ने जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। इसी क्रम में डीएम मानवेंद्र सिंह के निर्देशन पर जिला खनिज अधिकारी अरविंद कुमार ने समस्त खनिज पट्टाधारकों को निर्देशित कर दिया है कि वह 15 जुलाई तक अपने आधार कार्ड नंबर, मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी को अनुमोदित खनन योजना और पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र के साथ कलक्ट्रेट खनिज अनुभाग कार्यालय में जमा करा दें। वहीं, डीएम ने यह निर्देश दिए हैं कि एक अगस्त के बाद यदि कोई भी खनिज पट्टाधारक बिना ई-एमएम-11 के खनिज परिवहन करने पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
यह है प्रपत्र एमएम-11 का उपयोग
अवैध खनन को रोकने और खनिज रॉयल्टी वसूलने के लिए माह सितंबर वर्ष 2003 से प्रदेश सरकार द्वारा अभिवहन प्रपत्र एमएम-11 की व्यवस्था की थी। इस नियम के तहत खनिज पट्टाधारकों द्वारा खदानों व बालू के घाटों से निकाले गए खनिज ले जाने के लिए प्रपत्र एमएम-11 पर परिवहन किए जा रहे खनिज की मात्रा और वाहन की पहचान अंकित की जाती है। अब तक प्रदेश में भूतत्व व खनिकर्म निदेशक द्वारा राजकीय मुद्राणालयों से प्रपत्र एमएम-11 छापवाकर जिलाधिकारियों को उनकी मांग के अनुसार उपलब्ध कराए जाते थे। इस पर जनपद का कोड, वाहन के प्रकार के लिए पंचिंग एवं होलोग्राम लगा होता है। वर्तमान में जो ई-एमएम-11 लागू की जा रही है, इसमें शासन स्तर पर एक वेबपोर्टल तैयार किया गया है, इस पर प्रत्येक जनपद के खनिज पट्टा और परिहार क्षेत्र का विवरण संबंधित जनपद के डीएम के सत्यापन के बाद अपलोड किया जाएगा और इस वेब-पोर्टल पर समस्त पट्टाधारकों को अपनी लोगइन आईडी और पासवर्ड दिया जाएगा, जो आधार कार्ड से लिंक होगा और इसी वेबपोर्टल पर पट्टाधारक खनिज परिवहन के लिए ई-एमएम-11 जारी करेगा। इसके लिएसई-पेमेंट की व्यवस्था रखी गई है।
अवैध खनन के परिवहन पर लगेगा अंकुश
ई-एमएम-11 की व्यवस्था लागू करने की वजह शासन भले ही प्रपत्र एमएम-11 में उपयोग होने वाले कागजों के उपयोग को खत्म करके पर्यवेक्षक की सुगमता की बात कह रहा है। लेकिन, हकीकत यह है कि इससे अवैध खनन के परिवहन पर अंकुश लग सकेगा और सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी। जनपद में ऐसे भी कई पट्टाधारक हैं, जो आर्थिक लाभ के लिए केवल अपने प्रपत्र एमएम-11 का उपयोग अवैध खनन को संरक्षण देने में करते हैं। जब कभी भी खनिज विभाग या पुलिस के द्वारा अवैध खनिज परिवहन करते पकड़ा जाता है तो कुछ समय बाद कोई न कोई व्यवस्था करके इस खनिज परिवहन के संबंध में प्रपत्र एमएम-11 लेकर पहुंच जाता है, जिससे अवैध खनन कारोबारी पकड़ में नहीं आ पाते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। क्योंकि ई-एमएम-11 जारी होने की तिथि के साथ-साथ समय व वाहन की पहचान भी अंकित होगी, यदि कोई पकड़ने के बाद एमएम-11 जारी करता है तो समय के आधार पर वह पकड़ा जाएगा। इससे सरकार को राजस्व वसूली में फायदा मिलेगा।
ई-एमएम-11 को लागू करने के लिए शासन द्वारा मांगे गए डाटा को तैयार किया जा रहा है। समस्त पट्टाधारकों को निर्देशित कर दिया कि वह शनिवार तक अपने प्रपत्र कार्यालय में जमा कर दें। यह अच्छी व्यवस्था है इससे विभाग को राजस्व वसूली में मदद मिलेगी।
- अरविंद कुमार
जिला खनिज अधिकारी, ललितपुर।