डोंगराखुर्द/ललितपुर। पाली क्षेत्र में बालाबेहट रोड पर विंध्याचल पर्वत श्रंखला पर स्थित प्राचीन व पौराणिक एवं धार्मिक ऐतिहासिक धरोहर दूधई के मंदिर मरम्मत व सुरक्षा के अभाव में खंडहर होते जा रहे हैं। बारिश के मौसम में दूधई मंदिरों तक पहुंचने का जर्जर व कंकरीला रास्ता भी बंद हो जाता है। सुविधाओं के अभाव और उपेक्षा के चलते यह स्थान बदहाल है।
पाली तहसील से बालाबेहट रोड पर कनपुरा घाटी से कुछ दूर ग्राम दूधई विंध्याचल पर्वत श्रृंखला पर स्थित है। यहां के प्राचीन शिव मंदिर तक पहुंचने के लिए पहाड़ी के किनारे कच्चे कंकरीले-पथरीले रास्ते से होकर जाना पड़ता है। यहां पूरब दिशा में आकर्षक नक्काशी युक्त पत्थरों से बना आकर्षक सूर्य मंदिर, पश्चिम दिशा में शिव मंदिर, उत्तर दिशा में चबूतरे में पर रखी वराह अवतार की आकर्षक नक्काशी युक्त मूर्ति रखी हुई है। पश्चिम दिशा में अनेक मंदिर हैं जो वर्तमान में खंडहर अवस्था में हैं। दक्षिण दिशा में सैकड़ों की संख्या में खंडहर मूर्तियां बिखरी पड़ी हैं। सूर्य मंदिर और शिव मंदिर सेनस्टोन पत्थरों से बने मंदिरों का बैलेंस बड़े ही आकर्षक तरीके से बना हुआ है। जबकि, देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि इस मंदिर की चोटी तक सभी पत्थर असंतुलित तरीके से रखे हों और यह मंदिर कभी भी गिर सकता है। मंदिरों के पीछे का तालाब चौकोर पत्थरों की बड़ी-बड़ी पोरियों से बना हुआ है।
नहीं हो रहा ठीक से संरक्षण
दूधई में प्राचीन महत्व की पुरा संपदा का संरक्षण भी नहीं किया जा रहा है। इस प्राचीन क्षेत्र की प्रगति पुरातत्व विभाग की अनदेखी के कारण रुकी हुई है। यह मंदिर जिले के प्रसिद्ध प्राचीन मंदिरों में से हैं।
पर्यटन विभाग द्वारा यहां एक रेस्ट हाउस बनाया था, लेकिन वर्तमान में इसमें कोई इंतजाम नहीं हैं। सैलानी अलबरुनी ने दूधई का जिक्र करते हुए कहा था कि प्राचीन समय में दूधई एक बड़ा व्यापार का केंद्र व समूह था। लेकिन, अब यहां की कलाकृतियां जर्जर हाल में पड़ी हैं। एक उत्कृष्ट कला नष्ट होती जा रही है। दूधई के जीर्णोद्धार एवं विकास के लिए शासन-प्रशासन को पत्राचार किया गया है।
संतोष शर्मा, संयोजक, इंटैक ललितपुर चैप्टर।
दूधई में अलग से निर्माण नहीं किया जा सकता है। मरम्मतीकरण के लिए साल के अंत में एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा जाता है और जो बजट मिलता है, उसी के आधार पर काम कराया जाता है। यहां तक जाने के लिए सड़क मार्ग वन विभाग और ग्राम समाज के अंतर्गत आता है।
रवि रस्तोगी, अवर संरक्षक सहायक अधिकारी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग।