ललितपुर। आचार्य निर्भय सागर महाराज ने कहा कि भगवान की भक्ति, पूजा और परोपकार की ओर ले जाती है। उन्होंने कहा कि श्रावक मंदिर में चावल चढ़ाते हैं, यदि धान में वि उपसर्ग लगा देते हैं तो विधान बन जाता है। विधान में सम उपसर्ग लगते हैं तो संविधान बन जाता है। इसलिए हमें पूजा पाठ करते समय संविधान का पालन करना चाहिए। अपने देश के प्रति प्रेम रखना चाहिए। वह शुक्रवार को पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अटामंदिर में धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
आचार्यश्री ने कहा कि देह के प्रति नहीं प्रेम आत्मा की संपत्ति है। प्रेम के बिना जीवन चलना असंभव है। प्रेम होने पर ही व्यक्ति अहिंसा का पालन करता है। सर्वप्रथम पारिवारिक प्रेम होता है जो सुरक्षा व्यवस्था और आत्मीयता से जुड़ा होता है। दूसरा प्रेम रोमांटिक होता है जो उत्तेजनात्मक भावात्मक और क्षणिक होता है। तीसरा आत्मिक प्रेम होता है जो आध्यात्मिकता की ओर ले जाता है। यही सच्चा प्रेम है। उन्होंने कहा व्यक्ति को दया, अहिंसा, करुणा प्रेम का स्वभाव नहीं छोड़ना चाहिए।
इसके पूर्व सिद्ध चक्र विधान में प्रतिष्ठाचार्य पं. संतोष अमृत एवं अभिषेक जैन ने प्रभु अभिषेक शांति धारा की मांगलिक क्रियाएं संपन्न कराईं। कार्यक्रम का संचालन जैन पंचायत के महामंत्री आकाश जैन ने किया। शाम को आरती के उपरांत भजन संध्या में महिला मंडल की अनीता मोदी, अनुपमा बजाज, वीणा जैन, मनीषा जैन, प्रीति जैन, ज्योति औलिया, स्मिता जैन, नीतू जैन का योगदान रहा। इस दौरान डॉ अक्षय टडै़या, सनत खजुरिया, कैप्टन राजकुमार जैन, मनोज जैन, अजय जैन, अक्षय आलिया आदि मौजूद रहे।