दिगवार स्थित मंदिर में चल रही भागवत कथा में विराजे भगवान के स्वरुप
- फोटो : LALITPUR
भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर झूमे श्रद्घालु
ङोगरा खुर्द (ललितपुर)। शुक्रवार को दिगवार स्थित हनुमानजी मंदिर प्रांगण में आयोजित भागवत कथा में चौथे दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुनाई। जिसमें श्रीकृष्ण जन्म होते ही श्रद्घालु भाव विभोर हो गए।
शुक्रवार को कथाव्यास गौर प्रिया देवी ने कहा लोगों के जीवन में सुख व दुख मनुष्यों के कर्मों से ही होते हैं। कथा में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होते ही आंनदमय हो गए। उन्होंने कथा में बताया कि जन्म के समय जेल के ताले खुल गए, सभी पहरेदार नींद में चले गए। बासुदेव व देवकी की बेड़ियां टूट गईं और बंधन मुक्त हो गईं। भगवान को वासुदेव ने यमुना पार करके गोकुल नंद बाबा के छोङ़ आए। जहां पर बाबा के घर आनन्द मंगल गीत बधाई होने लगीं। उन्होंने कहा कि कंस ने बासुदेव के हाथों से कन्या सरूपी देवी को जमीन पर मारना चाहा तो वह कंस के हाथों से छूटकर आकाश में चलीं गईं। देवी रूप धारण कर बोली कंस मुझे मारने से क्या लाभ तेरा शत्रु तो गोकुल में पहुंच चुका है। यह दृश्य देखकर कंस हतप्रभ, व्याकुल हो गया। कंस ने श्रीकृष्ण को मारने के लिए अनेक दैत्य भेजे, लेकिन कृष्ण ने अपनी अलौकिक माया से दैत्यों को मारा। इसके अलावा अन्य भगवान की लीलाओं का वर्णन किया। इस दौरान ब्रह्मचारी रामराजन महाराज, रामेश्वर प्रसाद पाठक, पन्ना लाल दुबे, मोनू दीक्षित, पंचम सिंह, पूरन सिंह, वीरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, मोहन यादव, हीरालाल यादव, जमन यादव, पप्पू यादव, भूरे यादव सैकड़ों की संख्या में श्रृद्धालु मौजूद रहे