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Lalitpur News: देवेंद्र कौशिक की चौथी जमानत याचिका खारिज

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संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। अपर जिला एवं सत्र/विशेष न्यायाधीश (एससीएसटी एक्ट) की अदालत ने जबरन वसूली और एससीएसटी एक्ट के मामले में आरोपी देवेंद्र कौशिक की चौथी जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी की ओर से 18 फरवरी को आरोप विरचित होने के बाद 60 दिन से अधिक समय बीतने के बावजूद विचारण पूरा नहीं होने का तर्क दिया गया था। न्यायालय ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद माना कि विचारण में हुई देरी का कारण आरोपी पक्ष रहा है।
आरोपी के अधिवक्ता ने चौथी जमानत याचिका दाखिल कर दलील दी कि आरोप विरचित होने के बाद 60 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन विचारण पूरा नहीं हुआ। न्यायालय ने पत्रावली देखने के बाद पाया कि अभियोजन की ओर से 7 अप्रैल 2026 को वादी मुकदमा उदय राम वर्मा को साक्ष्य के लिए प्रस्तुत किया गया था। मुख्य परीक्षा पूरी होने के बाद आरोपी पक्ष की ओर से उनकी प्रतिपरीक्षा नहीं की गई।
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न्यायालय ने यह भी पाया कि आरोपी की पहली जमानत याचिका 30 जनवरी 2026, दूसरी एक जुलाई 2026 और तीसरी छह जुलाई 2026 को निरस्त हो चुकी है। दूसरी जमानत याचिका के खिलाफ उच्च न्यायालय, प्रयागराज में आपराधिक अपील विचाराधीन है। इसकी अगली सुनवाई 17 सितंबर 2026 को निर्धारित है।
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लगातार अधिवक्ता बदलने से हुई देरी
न्यायालय ने आदेश में उल्लेख किया कि आरोपी लगातार अपने अधिवक्ता बदलता रहा। प्रत्येक बार नए अधिवक्ता की ओर से समय मांगा गया, जिससे विचारण की कार्रवाई में विलंब हुआ। 21 अप्रैल 2026 को आरोपी को निजी अधिवक्ता नियुक्त करने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त अवसर भी दिया गया था। इसके बावजूद 30 जून और 13 जुलाई 2026 को साक्षी उपस्थित रहे, लेकिन आरोपी पक्ष की ओर से उनकी जिरह नहीं की गई।ल इन परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने विचारण में देरी के आधार पर दाखिल चौथी जमानत याचिका को स्वीकार करने से इन्कार करते हुए उसे खारिज कर दिया।
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