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परंपरागत माध्यम में लौटकर ही शिक्षा का विकास संभव : प्रो. गजेंद्र

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सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का हुआ शुभारंभ
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। बांसी स्थित सुदर्शन डिग्री कॉलेज में सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ नेहरू महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य व संस्थापक डॉ. आरएन यादव ने किया।
उच्च शिक्षा विभाग के पूर्व निदेशक प्रो. ब्रह्मदेव ने कहा कि शिक्षा को आभासी व भौतिक दोनों माध्यमों से छात्राओं को शिक्षा देनी चाहिए। नेहरू महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश शास्त्री ने कहा कि आचार्य में शिष्टाचार के पांच गुण सत्य, स्वाध्याय, नवीनता, शांति और इंद्रियों पर नियंत्रण करने की क्षमता होनी चाहिए। आईआईटी धनबाद के प्रो. गजेंद्र कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि हमें फिर से अपनी परंपरागत माध्यम में लौटना पड़ेगा, तभी शिक्षा का विकास हो सकता है।
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क्रिप्स की सदस्य दिव्या मालाकार ने ऑनलाइन शिक्षा के महत्व को बताते हुए कहा कि कोविड-19 में इसका सकारात्मक उपयोग देखने को मिला। दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. रजत कुमार संत ने कहा कि संचार के लिए अंग्रेजी बोलने की क्षमता का होना आवश्यक नहीं है बल्कि प्रभावपूर्ण तरीके से शिक्षण कार्य किया जाए तो संचार प्रभावशाली ही होगा। प्रबंधिका उमा यादव, प्राचार्य डॉ. सोनू श्रीवास्तव और कार्यक्रम के सचिव डॉ. मनजीत सिंह यादव, आईक्यूएसी प्रभारी अमरेंद्र कुमार लाल, आइक्यूएसी सह प्रभारी, डॉ. प्रकाश यादव आदि मौजूद रहे। संचालन डॉ. सेल्लन अली ने किया।
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