बेसिक शिक्षा विभाग
में संबद्घीकरण पर पूरी तरह रोक है, इसके बाद भी विद्यालय संचालन के नाम पर
नियमों को धता बताते हुए शिक्षकों की अस्थायी ड्यूटी लगा दी जाती है।- फूला था। हालांकि, अप्रैल- मई माह के दौरान जिलाधिकारी जुहेर बिन सगीर के सख्त निर्देशों के बाद उन्होंने अस्थायी ड्यूटी समाप्त करते हुए प्रशिक्षुओं को विद्यालय संचालन की जिम्मेदारी सौंप दी थी। वर्तमान में प्रशिक्षु बीआरसी एवं डायट में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, इसे दृष्टिगत रखते हुए जून माह के अंतिम दिनों में एक बार फिर शिक्षकों की अस्थायी ड्यूटी लगा दी गई हैं। यही नहीं, पूर्व में अस्थायी ड्यूटी पर रहे अनेक शिक्षकों को दोबारा इस व्यवस्था में शामिल कर लिया गया है। कइयों के तो ब्लाक बदलकर अस्थायी ड्यूटी दे दी गई, जिससे दूरदराज क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों में इस व्यवस्था के खिलाफ असंतोष पनपने लगा है।
नवागंतुक बीएसए रामपाल सिंह ने पदभार ग्रहण करते ही अस्थायी ड्यूटी समाप्त करने की घोषणा कर दी थी। इसी क्रम में उन्होंने अब सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से अस्थाई ड्यूटी का ब्योरा तलब किया है।
शिक्षक विहीन स्कूलों के संचालन के बहाने शिक्षकों की दर्जनों की संख्या में अस्थायी ड्यूटी लगाई जाती है। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो इस समय जिले में करीब डेढ़ सैकड़ा स्कूलों में पद सृजित नहीं हैं, जबकि अस्थायी ड्यूटियों की संख्या इससे कहीं अधिक है। न केवल शिक्षक, बल्कि शिक्षा मित्र एवं अनुदेशकों को भी अस्थायी ड्यूटी में लगा दिया गया है, जबकि, नियमत: संविदा कर्मियों को एक ग्राम पंचायत से दूसरी ग्राम पंचायत में नहीं लाया जा सकता है।