क्षेत्र में इन दिनों बगैर लाइसेंस के साहूकारी करने का गोरखधंधा जोरों पर चल रहा है। जरूरतमंद लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे मनमाना ब्याज वसूला जा रहा है। सूदखोरों द्वारा गरीबों और किसानों का शोषण किया जा रहा है। इस दिशा में प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई न करने से सूदखोरों के हौसले बुलंद हैं।
महरौनी कस्बा सहित क्षेत्र के अनेक गांवों में सेठ साहूकारों द्वारा बगैर लाइसेंस के साहूकारी की जा रही है। गरीब किसानों व मजदूरों को जब अपने आवश्यक कार्यों के लिए रुपयों की आवश्यकता पड़ती है तो वह मजबूरन इन साहूकारों की चौखट चूमते हैं। यहीं से उनके शोषण का सिलसिला शुरू हो जाता है। सूदखोरों द्वारा जरूरतमंदों को मनमाने ब्याज पर रुपया उधार दिया जाता है। यह ब्याज दर इतनी अधिक होती है कि कर्ज लेने वालों को मूलधन के साथ ब्याज चुका पाना काफी मुश्किल होता है। कर्ज देते समय साहूकार अपने कर्जदारों से गारंटी के तौर पर उनकी जमीन या कीमती जेवर गिरवी रख लेते हैं, जिनकी कीमत कर्ज पर उठाई गई धनराशि से कहीं अधिक होती है।
इसका फायदा उठाकर साहूकार कोरे स्टांप पेपर पर अपने कर्जदारों के हस्ताक्षर या अँगूठा निशानी लेकर मनमाने एग्रीमेंट तैयार करा लेते हैं। ऐसे में जब कर्जा चुकाने का समय आता है तो ब्याज इतना अधिक हो जाता है कि कर्जा लेने वालों के पैर तले जमीन खिसक जाती है। ऐसे में अनेक किसान कर्ज चुकाने में असमर्थ होने पर गिरवी रखे जेवर से हाथ धो बैठते हैं तो वहीं अपनी कीमती जमीन भी आधे पौने दामों पर उन साहूकारों के नाम रजिस्ट्री बैनामा करने को विवश हो जाते हैं और भूमिहीन हो जाते हैं।
जुआरियों और शराबियों से होती है मनमानी वसूली
क्षेत्र में जुआरियों और शराबियों को बढ़ावा देने में भी सूदखोर खासी भूमिका निभाते हैं। जुआ में रुपये हारने के बाद जुआरिओं को जब आगे दांव लगाने के लिये कहीं से रुपयों का इंतजाम नहीं होता तो ऐसे में उनके लिये गांव के कुछ साहूकार कर्ज दे देते हैं। इसके एवज में वह मनमाना ब्याज वसूलते हैं और यह ब्याज दर दिन के हिसाब से चलती है। कर्ज ली गयी धनराशि पर ब्याज तेज गति से बढ़ता है और कर्ज न चुका पाने की स्थिति में अपनी जमीन जायजाद से हांथ धो बैठते हैं। वहीं शराब की लत को पूरा करने के लिये शराबी भी इन सूदखोरों के चक्कर में पड़ जाते हैं और ब्याज की धनराशि मूलधन से भी अधिक हो जाती है।
नहीं चल रहा अभियान
कस्बा क्षेत्र सहित अनेक ग्रामों में सूदखोरों का मकड़जाल फैला हुआ है, जिसमें अनेक गरीब लोग फंसे हैं। साहूकारों के शोषण का शिकार हो रहे लोग चुपचाप उनकी ज्यादती सहने को विवश हैं। नियमानुसार साहूकारी के लिए लाइसेंस लेने की जरूरत होती है। प्रशासन इन साहूकारों की गतिविधियों पर नजर रखता है, जिससे कर्जदारों के शोषण पर काफी हद तक अंकुश लगता है। नगर व क्षेत्र के लाइसेंस धारी साहूकारों की सूची मांगी गई थी और अवैध रूप से साहूकारी करने वालों को चिन्हित किया गया था। कुछ मामलों में कार्रवाई भी हुई थी, लेकिन कुछ समय बाद यह अभियान ठंडे बस्ते में चला गया।
ग्रामीण ने की तहसील समाधान दिवस में शिकायत
महरौनी। कोतवाली अंतर्गत ग्राम धवारी निवासी ग्रामीण छक्कीलाल कुम्हार ने तहसील समाधान दिवस में एक शिकायती पत्र देकर गांव के ही एक व्यक्ति पर उसकी जमीन हथियाने का आरोप लगाते हुये कार्रवाई की मांग की है। अवगत कराया गया कि कुछ महीने पहले उसकी पत्नी असाध्य रोग से पीड़ित थी और उसके इलाज के लिये रुपयों की आवश्यकता थी। इसके लिए उसने गांव के धर्मेंद्र कुमार से डेढ़ लाख रुपये उधार लिये थे। जिसके लिये उक्त व्यक्ति ने एक स्टांप पेपर पर छक्कीलाल की कीमती जमीन गिरवी रखने का एग्रीमेन्ट तैयार कराया था। इलाज कराने के वावजूद छक्कीलाल अपनी पत्नी को नहीं बचा सका। आरोप है कि अब वह अपना कर्ज ब्याज सहित वापिस लौटाना चाहता है लेकिन तथाकथित साहूकार गिरवी रखी जमीन हड़पना चाहता है और आनाकानी कर रहा है। वह कम दाम पर उस जमीन को बेचने का दबाव बना रहा है। पीडित ने साहूकार के चंगुल से उसकी जमीन मुक्त कराने और कानूनी कार्यवाही की मांग की है।
साहूकारों द्वारा किसानों के शोषण या उत्पीड़न के मामले संज्ञान में आने पर संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बगैर लाइसेंस के साहूकारी करना अवैध है। अगर ऐसा चल रहा है तो पीड़ित इसकी शिकायत करें, नियमानुसार उचित सख्त कार्रवाई होगी।
डीपी सिंह, एसडीएम महरौनी