ललितपुर। परिषदीय विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना में अनाज का आवंटन कम पड़ रहा है। इससे ग्राम प्रधान और शिक्षकों की कर्जदारी विभाग पर चढ़ती पर जा रही है। वे बाजार से अनाज खरीद कर बच्चों को मिड-डे मील खिला रहे हैं। हालांकि, विभागीय अफसर इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे कर्जदारी पर कोई निर्णय नहीं हो पा रहा है।
राजकीय, सहायता प्राप्त और बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा एक से आठ तक के छात्र-छात्राओं को मध्याह्नतर में पौष्टिक एवं गर्म भोजन मुहैया कराया जाता है। विभाग द्वारा प्राथमिक विद्यालयों में प्रति बच्चे को सौ ग्राम एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रति बच्चे को डेढ़ ग्राम के हिसाब से अनाज आवंटित किया जाता है। जिससे मेन्यू के आधार पर बच्चों को भोजन परोसा जाता है। प्रत्येक सोमवार एवं माह के अंतिम बृहस्पतिवार को फल वितरित किए जाते हैं। इसके अलावा दूध का भी वितरण किया जाता है।
मिड-डे मील पंजिका में बच्चों की उपस्थिति, अनाज का आवंटन, उपभोग, ओपनिंग बैलेंस और रसोइया मानदेय के भुगतान का ब्योरा चढ़ाया जाता है। जिले के कई ग्राम प्रधान और शिक्षक अपने विद्यालयों में बच्चों को ज्यादा खुराक दे रहे हैं, जिससे स्कूल को आवंटित अनाज कम पड़ जा रहा है, ऐसे में वे अनाज की पूर्ति बाजार से खरीदकर कर रहे हैं। इसके बाद उसका भुगतान विभाग से मांग रहे हैं। विभागीय अफसर ग्राम प्रधान एवं शिक्षकों द्वारा भुगतान के संबंध में किए गए जा रहे पत्राचार को फाइल में रखते जा रहे हैं। इससे विभाग पर निरंतर कर्जदारी बढ़ती ही जा रही है। उधर, बाजार से खरीदे गए अनाज का भुगतान नहीं होने से उनमें असंतोष पनप रहा है।
विभाग पर इन स्कूलों का चढ़ा कर्ज
विकासखंड महरौनी में टीचर कॉलोनी जूनियर हाईस्कूल ने 31 क्विंटल, उच्च प्राथमिक स्कूल पठा ने 28 क्विंटल, पूराकलां स्कूल ने 54 क्विंटल, ब्लाक जखौरा के धुरवारा स्कूल ने 25 क्विंटल, किसलवास स्कूल ने 22 क्विंटल, पिपरा स्कूल ने 29 क्विंटल 38 किलोग्राम, पाचौनी स्कूल ने 26 क्विंटल 19 किलोग्राम, ब्लाक बार के चकौरा स्कूल ने 34 क्विंटल, मिर्चवारा स्कूल ने 18 क्विंटल, 72 किलोग्राम, खजरा स्कूल ने 18 क्विंटल, 20 किलोग्राम, पूराबिरधा स्कूल ने 36 क्विंटल 46 किलोग्राम, भड़रा स्कूल ने 19 क्विंटल, 19 किलोग्राम और डोंगराखुर्द ने 31 क्विंटल 22 किलोग्राम अनाज बाजार से खरीदकर खिलाया। यह स्थिति अक्तूबर 19 तक की है। कई अन्य विद्यालयों का भी इसी तरह का कर्जा हो गया है।
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भुगतान में यहां फंस रहा पेच
जब विद्यालयों का अनाज का आवंटन किया जाता है तो उसकी सैंपलिंग कराई जाती है। इसके उपरांत उस अनाज से भोजन पकाया जाता है। जो अध्यापक या ग्राम प्रधान अनाज की खरीद बाजार से दिखा रहे हैं, उसमें भी यह प्रक्रिया अपनाना आवश्यक है, लेकिन ऐसा किया नहीं जा रहा है। इससे संबंधित अध्यापक एवं ग्राम प्रधानों का दावा पुख्ता नहीं हो पा रहा है। इस तरह की खरीदारी पर सवाल अलग उठ रहे हैं कि बाजार से खरीदा गया अनाज गुणवत्तापरक था या नहीं और जो रेट दर्शाया जा रहा है, क्या वास्तव में उसी रेट में अनाज खरीदा गया है। कितने स्कूलों की ओर से अनाज के भुगतान का दावा किया जा रहा है, इसका भी अभी तक ब्योरा विभाग में तैयार नहीं किया गया है और न ही भुगतान संबंधी कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिए कोई संबंधित से पत्राचार व अभिलेख मांगे गए हैं।
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निरीक्षणों में मिलती ये कमियां
अफसरों द्वारा स्कूलों के निरीक्षण किए जाते हैं। इस दौरान विभिन्न स्कूलों में तमाम कमियां नजर आती हैं। इसमें कई शिक्षक मिड डे मील पंजिका में फल का नाम नहीं लिखते हैं। इससे संबंधित फल की कीमत स्पष्ट नहीं हो पाती है। मिड डे मील पंजिका में ओपनिंग बैलेंस व अवशेष बैलेंस का जिक्र नहीं होता है। यही स्थित अनाज के मामले में होती है। बच्चों की फर्जी हाजिरी चढ़ाने के मामले आए दिन उजागर होते हैं। कई कोटेदार के रजिस्टर व शिक्षक के रजिस्टर में अनाज के आवंटन के ब्योरा में अंतर पाया जाता है।
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जिन शिक्षकों द्वारा माइनस कनर्वजन कास्ट एवं अनाज दर्शाया जा रहा है, उनका ब्योरा तैयार किया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- भरत कुमार वर्मा
खंड शिक्षा अधिकारी