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समर्पण, श्रद्धा और भक्ति ही धर्म

Fri, 18 Mar 2016 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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Dedication, lalitpur news - फोटो : amar ujala
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महरौनी (ललितपुर)। अतिशय तीर्थ बानपुर से विहार करते हुए गणाचार्य विरागसागर जी महाराज ने ससंघ महरौनी में मंगल प्रवेश किया। इस मौके पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि समर्पण, श्रद्धा और भक्ति ही धर्म है।
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विद्या सागर प्रवचन हाल में धर्मसभा में आचार्यश्री ने कहा कि मनुष्य के जीवन में पाप नहीं टिकें, इसके लिए शास्त्रों में उपाय बताए गए हैं। वह उपाय हैं, भगवान के दर्शन, भक्ति और संत का सत्संघ। उन्होंने कहा कि मनुष्य स्वार्थ के लिए मंदिर जाता है। दुखों को दूर करने और कुछ पाने की अभिलाषा से मंदिर जाता है। मंदिर जाने के लिए समर्पण और श्रद्धा की आवश्यकता है। सच्चे मन से जब सिर झुकता है, तो आत्मा की मलिनता दूर हो जाती है। बाल्टी के पानी में डला कचरा दूर करने के लिए उसे झुकाना पड़ता है, इसी प्रकार मन के विकारों को दूर करने के लिए प्रभु के आगे मस्तक झुकाना पड़ता है।

इससे पहले आचार्यश्री के आगमन से श्रद्धालुओं में हर्ष दौड़ गया। आचार्यश्री के मंगल आगमन पर नगर को झड़ों व बैनरों से सजाया गया। प्रात: काल से ही लोग नगर के बानपुर चौराहा पर महाराजश्री की अगुवाई के लिए एकत्रित होने लगे थे। महाराजश्री की अगवानी जैन समाज द्वारा की गई और गाजेबाजे के साथ नगर भ्रमण कर संघ को बडे़ मंदिर ले जाया गया।
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श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री के पाद प्रछालन और आरती उतार कर आशीर्वाद लिया। विद्यासागर प्रवचन हाल में धर्मसभा का आयोजन किया गया। जैन समाज ने आचार्यश्री के चित्र का अनावरण और दीप जलाया। रतन गढौली ने पाद प्रछालन और शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य विमर्श जाग्रति मंच को प्राप्त हुआ। मंगला चरण सपना सिंघई ने किया। मंच संचालन सतीश सिंघई व नितिन सिंघई ने किया।
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