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छोटी डेयरी खोलकर कमा सकते हैं प्रतिवर्ष तीन लाख रुपये

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कृषि विज्ञान केंद्र पर प्रशर क्षण के बाद प्रमाण पत्र दिखाते प्रशिक्षु - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। शुक्रवार को कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा पांच दिवसीय डेयरी फार्मिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम समापन किया गया। प्रशिक्षण में 15 युवकों ने प्रतिभाग किया। पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. मारूफ अहमद ने डेयरी फार्मिंग पर बताया कि जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए जनपद में गाय की नस्ले जैसे थारपारकर, गिर और साहीवाल के चयन की सलाह दी। भैंस की नस्ले जैसे मुर्रा और नीली रावी उपयुक्त हैं। साथ ही डेयरी के लिए जगह का चुनाव, पशु घर का आकार और बनावट के बारे में प्रशिक्षार्थियों को संपूर्ण जानकारी दी। पशुओं के लिए हरे चारे की विभिन्न प्रजातियां जैसे बरसीम (बीबी-2, वरदान), जई (केंट) व बहुकटाई वाली चरी आदि की जानकारी दी। उन्होंने पशुुओं में होने वाली बीमारियों और टीकाकरण के बारे चर्चा की। डा. अहमद ने बताया कि यदि ग्रामीण युवक अपने क्षेत्र में रहकर आठ से दस गाय/भैस की एक छोटी डेयरी इकाई खोलकर ढाई से तीन लाख रुपये प्रतिवर्ष आसानी से कमा सकते हैं। अंत में प्रशिक्षार्थियों को नजदीक की एक व्यवस्थित डेयरी इकाई का भ्रमण किया। प्रशिक्षण में युवकों को केंद्र द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किए। इस दौरान डॉ. दिनेश तिवारी, डॉ. सरिता देवी मौजूद रहीं।
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