महरौनी (ललितपुर)। मुनि प्रशांत सागर ने कहा कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ लौकिक शिक्षा की भी आवश्यकता है, क्योंकि आधुनिक शिक्षा में संस्कारों की कमी है और लौकिक शिक्षा से बच्चे संस्कारित होते हैं। आज भारतीय शिक्षा पर पाश्चात्य शिक्षा हावी हो रही है, जिससे बच्चों का नैतिक पतन हो रहा है। वह शुक्रवार को नगर में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे।
आचार्य विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि प्रशांतसागर महाराज, मुनि निर्वेग सागर महाराज, मुनि विमल सागर महाराज, मुनि अनंतसागर महाराज, मुनि धर्मसागर महाराज, मुनि अचलसागर महाराज, मुनि भावसागर महाराज, क्षुल्लक देवानंद सागर महाराज का नगर आगमन पर श्रद्धालुओं में खुशी की लहर दौड़ गई। शुक्रवार सुबह मुनि संघ ने नगर में प्रवेश किया श्रद्धालुओं ने भाव भक्ति के साथ आगवानी की। मुनि का द्वार द्वार पर पाद प्रछालन किया गया, शोभायात्रा के रूप में मुनि संघ और आर्यिका संघ श्रावकों के साथ बडे़ मंदिर पहुंचा, जहां दिगंबर जैन पंचायत के पदाधिकारियों ने पाद प्रच्छालन किया।
इस अवसर पर हुई धर्म सभा में आचार्य विद्यासागर द्वारा भारतीय शिक्षा में सुधार के लिए काफी कार्य किए जा रहे। भारत का गौरवशाली इतिहास रहा है यहां संस्कृति और धर्म का महत्व रहा है। इस मौके पर मुनि विमल सागर महाराज ने कहा कि बच्चे फास्ट फूड के आदी होकर अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं इसके लिए सबसे बडे़ दोषी माता पिता हैं जो बच्चों को भारतीय व्यंजन की जगह फास्ट फूड परोस रहे हैं। आर्यिका रत्न विज्ञान मति माताजी ने भी अपने प्रवचन के माध्यम से गुरु की महिमा का वर्णन किया।