ललितपुर। रक्षाबंधन पर्व पर अपने भाई-बहनों के घर जाने वालों को ट्रेनों में आरक्षण नहीं मिल पा रही है। आलम यह है कि मुंंबई, इंदौर, मथुरा, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर की ओर जाने वाली अधिकांश ट्रेनों में कोई सीट खाली नहीं है। वही जनरल कोच में अभी से ही खड़े होने के लिए भी यात्रियों को जगह नहीं पा रही है।
इस वर्ष रक्षा बंधन पर्व 28 अगस्त को मनाया जा रहा है। पर्व को लेकर कहीं बहनें अपने भाई के घर जा रहीं तो कहीं भाई बहनों के घर राखी बंधवाने आ रहे हैें। बैंक व न्यायालय कर्मियों को पर्व शुक्रवार को पड़ने के कारण तीन छुट्टियां मिल रही हैं। ऐसे में लोग अपने घर जाने का प्लान पहले ही बना चुके हैं लेकिन अब ट्रेन में सीट न मिलने से उन्हें परेशानी हो रही है। अधिकांश ट्रेनों में 26 व 27 अगस्त को कानपुर, लखनऊ की ओर जाने वाली दादर-गोरखपुर, कुशीनगर, राप्तीसागर एक्सप्रेस में स्लीपर व थर्ड एसी में कोई जगह नहीं है। जबकि, द्वितीय व प्रथम श्रेणी एसी में एक से तीन वेटिंग चल रही है। 26,27,28 अगस्त में भी राप्तीसागर एक्सप्रेस में ऐसी ही स्थिति है। सीतापुर एक्सप्रेस, कुशीनगर एक्सप्रेस और पुष्पक एक्सप्रेस में स्लीपर श्रेणी में भी 27 अगस्त तक कोई जगह नहीं है। जबकि दादर गोरखपुर एक्सप्रेस में एसी श्रेणी में एक से दो वेटिंग चल रही है। साबरमती, कुशीनगर, इंदौर-पटना एक्सप्रेस में भी स्लीपर में जगह नहीं है।
इंदौर-पटना एक्सप्रेस में किसी भी श्रेणी में 27 अगस्त तक कोई जगह नहीं है। निजामुद्दीन, हरिद्वार की ओर जाने वाली उत्कल एक्सप्रेस में किसी श्रेणी में 26 से 27 अगस्त तक कोई जगह नहीं है। डाउन रूट की सचखंड एक्सप्रेस में भी स्लीपर, व थर्ड एसी में कोई जगह नहीं है। डाउन रूट की हीराकुंड एक्सप्रेस में स्लीपर में 70, थर्ड एसी व द्वितीय श्रेणी एसी में कोई जगह नहीं है। वहीं, ललितपुर से हजरत निजामुद्दीन जाने वाली के लिए श्रीधाम एक्सप्रेस में स्लीपर में कोई जगह नहीं है, जबकि एसी श्रेणी में 24 से 42 तक वेटिंग चल रही है। वहीं समता एक्सप्रेस, छत्तीसगढ़, झेलम, पंजाबमेल, दादर अमृतसर, पातालकोट, दक्षिण एक्सप्रेस, मालवा, कुरुक्षेत्र, गोंडवाना एक्सप्रेस में 27 अगस्त तक स्लीपर व एसी भी सीटें फुल चल रही हैं। त्योहार को लेकर सामान्य डिब्बे पूरी तरह ठसाठस भरे चल रहे हैं, जबकि स्लीपर और एसी में भी वेटिंग टिकट वालों की संख्या बढ़ गई है। इससे लोकल यात्रियों को भी काफी परेशानी होती है। सामान्य डिब्बे में जगह न मिलने पर वे स्लीपर व एसी कोच में जाते हैं तो वहां जांच टीमों के निशाने पर रहते हैं।