बार (ललितपुर) बारिश न होने से किसान सूखे खेत देखकर परेशान हैं। हर वर्ष इन दिनों फसलों की निराई गुड़ाई का काम शुरू हो जाता था लेकिम इस बार ऐसा नहीं हुआ। किसानों का कहना है कि 27-28 जून को थोड़ी बारिश हुई थी जिसमें क्षेत्र के आधे से ज्यादा गांव के किसानों ने खेतों में उड़द, मूंग, तिल, मूंगफली मक्का आदि की बुवाई कर दी थी इसके बाद बारिश न होने से फसलें सूख रहीं हैं।
यह क्षेत्र कंकरीला पथरीला होने के कारण किसान खरीफ की फसल बरसात के पानी पर ही निर्भर होकर करता है क्योंकि गर्मी के मौसम में अधिकतर क्षेत्र के कुएं, तालाब, नाले सूख जाते हैं। नतीजतन किसान खरीफ की फसल बरसात के पानी में ही तैयार करता है लेकिन इस वर्ष जुलाई माह का आधा समय निकल गया है, जिन किसानों ने खेत में बीज बोया था वह अंकुरित तो हुई लेकिन पानी के अभाव में खेतों में अंकुर सूख गए हैं जिससे किसानों की इस खरीफ फसल की उम्मीद टूटती जा रही है। वहीं जिन किसानों ने अभी तक बुवाई नहीं की थी वह अब खरीफ की फसल लेट हो जाने से बीज अपने घर में तैयार रखे हुए हैं और सूखे खेतों को देख कर परेशान हो रहे।
तीन चार वर्ष से इस क्षेत्र का किसान खरीफ की फसल से काफी नुकसान झेल रहा है अतिवृष्टि से तैयार की हुई फसल नष्ट हो जाती है तो किसी वर्ष किसानों को सूखे की मार झेलनी पड़ती है। राजकुमार सिंह बुंदेला, किसान भेलौनी सुवा
बारिश न होने के कारण मेरे द्वारा खेतों में बोई गई उरद एवं मूंगफली की फसल सूख रही है। सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी न होने के कारण खेतों में धूल उड़ रही है। अभी फसल बीमा का पैसा भी नहीं आया। मनोज गोस्वामी, किसान धमना बार
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बारिश के लिए विंध्यवासिनी देवी मां का पूजन कर 1111 दीपक जलाए
बार (ललितपुर) क्षेत्र के अधिकतर गांव में आषाढ़ मास के महीने में देवी-देवताओं के मंदिरों पर एवं चबूतरों पर धार्मिक कार्यक्रम करने की पुरानी परंपरा चली आ रही है। कस्बे की विंध्यवासिनी माता मंदिर पर मंदिर के पुजारी नरसिंह दास मिश्रा की अगुवाई में क्षेत्र के ग्राम धमना, पुलवारा, बार, मोती खेड़ा, गेदौरा आदि गांव के लोगों ने माता विंध्यवासिनी के मंदिर में 1111 दीपों को प्रज्वलित कर माता से अच्छी बारिश की कामना की गई। लोगों ने माता विंध्यवासिनी और भगवान इंद्र की पूजा की। लोगों की मान्यता है कि आने वाले चौमासे में लोगों को होने वाली गंभीर बीमारियों से बचाव एवं फसलों की अच्छी उपज और पालतू जानवरों की रक्षा के लिए आषाढ़ मास में हर वर्ष माता विंध्यवासिनी के मंदिर में इस प्रकार के धार्मिक कार्य हमेशा से किए जाते रहे । इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से शिवम मिश्रा, दिनेश पुजारी, कृष्ण चंद्र मिश्रा, आनंद गोस्वामी, दिल सिंह यादव, माधव सिंह यादव, उमाकांत गोस्वामी, भज्जू यादव, प्रदीप रावत, रामलाल गुप्ता, श्यामसुंदर गोस्वामी, सत्यम गोस्वामी के अलावा क्षेत्र के महिला और पुरुषों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया।