ललितपुर। ‘कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं’ यह कहावत उस समय सच साबित हो
गई, जब नाराहट थाना पुलिस ने दो हत्या करके 22 वर्षों से फरार चल रहे पांच
हजार के ईनामी बदमाश को नागपुर महाराष्ट्र में दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया।
दो हत्याएं करके फरार हुआ नत्थू नागपुर में जाकर गोपाल बन गया था। इस
कामयाबी के लिए पुलिस अधीक्षक ने पुलिस टीम को नकद पुरस्कार और प्रशस्ति
पत्र देने की घोषणा की है।
नाराहट थानाध्यक्ष रामसहाय सिंह की टीम ने
नागपुर महाराष्ट्र में दबिश देकर नत्थू उर्फ गोपाल को गिरफ्तार कर लिया।
ग्राम पटना निवासी नत्थू पुत्र बारेलाल उर्फ गोपाल नाराहट मड़ावरा क्षेत्र
में हत्या की दो वारदातों को अंजाम देकर फरार चल रहा था। नागपुर में फरारी
के दौरान वह गोपाल बनकर ट्रक चलाकर भरण पोषण कर रहा था। 19 जून 1993 में
पुलिस उसके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई कर चुकी है। वर्ष 2013 में तत्कालीन
पुलिस अधीक्षक ने उसकी गिरफ्तारी पर ढाई हजार रुपये का इनाम घोषित किया था,
लेकिन पुलिस उसे पकड़ने में कामयाब नहीं हो सकी थी। वर्ष 2014 में नत्थू
की गिरफ्तारी के लिए तत्कालीन थानाध्यक्ष हाकिम सिंह एवं बार थानाध्यक्ष
आरसी दीक्षित के नेतृत्व में टीमें भी गठित की गई थी, लेकिन सफलता नहीं
मिली।
पुलिस अधीक्षक प्रभाकर चौधरी ने नत्थू पर घोषित इनाम को पांच
हजार रुपये करते हुए अपर पुलिस अधीक्षक सुधा सिंह के निर्देशन में आरोपी की
गिरफ्तारी के लिए ऑपरेशन शुरू किया, जिसमें पुलिस को सफलता हाथ लग गई।
केस नंबर - 01
चाकू से गोदकर की थी हत्या
नत्थू
कुशवाहा पर आरोप है कि उसने वर्ष 2013 में नाराहट थाना अंतर्गत ग्राम पटना
निवासी सूका (19 वर्ष) पुत्र गोरेलाल की चाकू से गोदकर हत्या कर दी थी।
दोनों लोग शिकार के लिए जंगल में गए थे, जहां किसी बात पर विवाद होने पर
नत्थू ने हत्या की वारदात को अंजाम दे दिया।
केस नंबर - 02
तमंचे से की थी युवक की हत्या
नत्थू
कुशवाहा पर वर्ष 2095 में मड़ावरा कस्बा निवासी मंगल (35 वर्ष) पुत्र
कंछेदी राजपूत की देसी तमंचे से गोली मारकर हत्या करने का भी आरोप है।
दोनों ही लोग पान की गुमटी पर खड़े हुए थे, जहां किसी बात पर विवाद होने पर
नत्थू ने हत्या की दूसरी वारदात को अंजाम दिया था।
‘‘
दो हत्याएं करने के बाद फरार चल रहे नत्थू कु शवाहा की गिरफ्तारी जिले की
पुलिस के लिए बड़ी चुनौती थी, जिसके लिए गोपनीय जाल बिछाया गया। इस ऑपरेशन
में अभिसूचना इकाई की भी मदद ली गई। काफी मशक्कत के बाद पुलिस को सफलता मिल
गई।’’
- प्रभाकर चौधरी
पुलिस अधीक्षक, ललितपुर।