शहर कोतवाली क्षेत्र के बड़ापुरा मुहल्ला निवासी ठेकेदार अनूप सहाय की हत्या के मामले में पुलिस को दो खत हाथ लग गए हैं। यह दोनों खत पुलिस अधीक्षक और जिला जज को संबोधित करते हुए नौ साल पहले लिखे गए थे और अंतिम समय तक करीबी रहे दो लोगों पर हत्या का शक जताया गया था। घर की सफाई के दौरान मिले इन खतों को परिजनों ने पुलिस को सौंप दिया है।
गौरतलब हो कि शहर कोतवाली अंतर्गत बड़ापुरा मुहल्ला निवासी अनूप सहाय की दो फरवरी की रात बाइक सवार तीन अज्ञात हत्यारों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद से लगातार जांच में जुटी पुलिस को कोई सुराग हासिल नहीं हो पा रहे थे और मामला ठंडे बस्ते में जाता नजर आ रहा था। मामले के खुलासे के लिए जहां पुलिस ने अनूप सहाय के सभी करीबियों से लंबी पूछताछ कर खुलासा करने का प्रयास किया वहीं विभिन्न सामाजिक और व्यापारिक संगठनों ने हत्याकांड के खुलासे की मांग की। वहीं बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री ने कानून व्यवस्था की समीक्षा के दौरान हत्याकांड का जल्द खुलासा करने के निर्देश दिए थे।
शनिवार को अनूप के परिजन घर की सफाई कर रहे थे। इसी दौरान उनके हाथ नौ साल पुराने दो खत लगे। यह खत पुलिस अधीक्षक और जिला जज को संबोधित कर लिखे गए थे। दोनों खतों पर 29 जुलाई 2009 की तारीख पड़ी हुई है और इबारत एक जैसी है। खत में लिखा गया है कि उसके दो पार्टनरों पर उसके नकद 12 लाख रुपये निकलते हैं, यदि उसे कुछ होता है तो वह लोग ही उसकी मौत के जिम्मेदार होंगे। इसके साथ ही अधिकारियों से मांग की गई है कि उक्त रुपयों को दोनो लोगों से लेकर अनूप के घर पहुंचवाने की अपील की है। खत के अनुसार उक्त रुपये उसके पिछले कई सालों की गाढ़ी कमाई के रुपये हैं जो पार्टनरों की नियत में खोट आने के कारण वापस नहीं मिल रहे हैं। अनूप ने पत्र में उक्त लोगों को प्रभावशाली बताते हुए धमकी देते हुए चुप कराने की भी बात कही है। कमरे में मिले इन पत्रों को परिजनों ने पुलिस को सौंप दिया है।
पुलिस अब इन पत्रों की जांच करने में तेजी से जुट गई है। पत्र में जिन दो लोगों का जिक्र किया गया है वह अनूप के अंतिम समय भी करीबी रह चुके हैं। इन पत्रों के मिलने के बाद अनूप मर्डर मिस्ट्री के जल्द खुलासे के आसार नजर आने लगे हैं।
पत्रों को हत्याकांड की विवेचना में शामिल कर लिया गया है और हैंड राइटिंग से मिलान करवाते हुए सभी पहलुओं पर जांच की जाएगी और मामले का जल्द खुलासा किया जाएगा।
अवधेश कुमार विजेता, अपर पुलिस अधीक्षक