ललितपुर। जिला कारागार में कैदियों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। यहां न तो सीसीटीवी कैमरे हैं और न ही जैमर लगाए गए हैं। वहीं, वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से कैदियों की पेशी करवाने के लिए लगाए गए उपकरण भी धूल फांक रहे हैं। जबकि, यहां क्षमता से तीन गुना अधिक कैदी बंद हैं। इस ओर ध्यान नहीं दिए जाने से स्थितियां बिगड़ती जा रही हैं।
प्रदेश की जेलों में बंदियों और उनके मिलने वालों पर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाए जा रहे हैं। इसके अलावा कैदियों द्वारा मोबाइल का प्रयोग रोकने के लिए जैमर की व्यवस्था की जा रही है। वहीं, ललितपुर का जिला कारागर इन सुरक्षा इंतजामों से अछूता बना हुआ है। जेल में न तो सीसीटीवी कैमरे हैं और न ही जैमर का इंतजाम है। इसके अलावा जेल में क्षमता से अधिक कैदी भी बंद हैं। जानकारी के अनुसार जिला कारागार में सौ कैदियों के बंद करने की क्षमता है।
जबकि इस वर्तमान में 350 से अधिक कैदी बंद हैं। इन कैदियों में 70 प्रतिशत से अधिक हत्या के आरोप में बंद हैं। जेल में बंद कैदियों में 22 महिला कैदी और छह बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा संवेदनशील बंदियों की सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए जेलों में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से पेशी करने की सुविधा दी गई है। जेल में टेक्निशयन न होने के कारण बंदियों को इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यहां लगाए गए उपकरण धूल फांक रहे हैं।
मुख्तार अंसारी को भेजने की थी योजना
बाहुबली मुख्तार अंसारी को भी ललितपुर जेल में शिफ्ट करने की योजना थी। इस संबंध में तत्कालीन डीजीपी देवाशीष पांडा ने आदेश भी जारी कर दिया था। इसके बाद सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस आदेश को निरस्त कर मुख्तार को बांदा जेल में शिफ्ट कर दिया गया था।
शासन से निर्देश मिलेंगे तो कैमरे लगवाएंगे
जेल में सुरक्षा व्यवस्था के लिए प्रदेश सरकार ही निर्णय लेती है। जेल प्रशासन की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं भेजा जाता है। यदि प्रदेश सरकार से निर्देश मिलेंगे तो कैमरे लगवाए जाएंगे।
- रेवन सिंह, जेलर
जेलर से मीटिंग कर पूछेंगे हालात
जेल में जो भी समस्याएं होंगी उनको दूर किया जाएगा। सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। जेलर से मीटिंग कर समस्याओं को पूछा जाएगा और प्रदेश सरकार से संबंधित उपकरण आदि की मांग की जाएगी।
- मानवेंद्र सिंह, जिलाधिकारी